विकास या विनाश, पुल की बढ़ी ऊंचाई से दर्जनों घरों पर संकट, ग्रामीणों ने रुकवाया निर्माण

विश्रामपुर (पलामू)

बी मोड़–उंटारी रोड मुख्य पथ पर गोदरमा गांव के समीप भेलवा नदी पर बन रहा पुल अब विकास से ज्यादा विवाद का कारण बनता जा रहा है। पलामू जिला पथ निर्माण विभाग द्वारा कराए जा रहे इस निर्माण कार्य को लेकर शुक्रवार को ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। संवेदक की मनमानी और निर्माण में भारी अनियमितता का आरोप लगाते हुए आक्रोशित ग्रामीणों ने कार्यस्थल पर पहुंचकर जमकर हंगामा किया और काम बंद करा दिया।
ग्रामीणों का आरोप है कि पुल का निर्माण एस्टीमेट से हटकर किया जा रहा है। संवेदक ने पुल की ऊंचाई करीब डेढ़ मीटर तक बढ़ा दी है, जिससे आसपास के करीब दर्जनों घरों का निकास पूरी तरह बंद होने का खतरा पैदा हो गया है। यदि पुल इसी तरह बनता है तो उन घरों से नाली और बारिश का पानी निकलना भी मुश्किल हो जाएगा और लोगों का जीवन गंभीर समस्या में फंस सकता है।
मामले को लेकर ग्रामीणों ने पलामू उपायुक्त को हस्ताक्षर युक्त आवेदन देकर पूरे प्रकरण की जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीण कमलेश विश्वकर्मा ने बताया कि पुल के ऊपर 172 मीटर और उंटारी रोड की ओर 168 मीटर पहुंच पथ बनने के बावजूद पुल का लेवल नहीं मिल रहा है। यह विभागीय लापरवाही और अदूरदर्शिता का स्पष्ट उदाहरण है।
वहीं ग्रामीण राजमणि विश्वकर्मा, ललन विश्वकर्मा और राजकुमार विश्वकर्मा ने आरोप लगाया कि अपनी गलती छिपाने के लिए विभागीय पदाधिकारी और संवेदक अब नाली व गाइड वॉल बनाने का आश्वासन देकर ग्रामीणों को समझाने का प्रयास कर रहे हैं।
जब मौके पर पहुंचे सहायक अभियंता रामबिलास तुरी से ग्रामीणों ने एस्टीमेट के आधार पर सवाल किए तो उनके पास कोई स्पष्ट जवाब नहीं था। उन्होंने केवल इतना कहा कि निर्माण कार्य एस्टीमेट के अनुसार ही कराया जा रहा है। जबकि ग्रामीणों का कहना है कि मापी के अनुसार पुल की ऊंचाई करीब पांच फीट बढ़ा दी गई है, जिससे यह समस्या उत्पन्न हुई है।
ग्रामीणों ने साफ कहा कि वे विकास कार्य के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विभागीय लापरवाही के कारण यदि सैकड़ों वर्षों से बसे घरों का रास्ता ही बंद हो जाए तो इसे विकास नहीं बल्कि अन्याय कहा जाएगा।
इस संबंध में कार्यपालक अभियंता विनय कुमार ने दूरभाष पर बताया कि उन्हें जो एस्टीमेट प्राप्त हुआ है उसी के अनुसार निर्माण कार्य कराया जा रहा है। हालांकि ग्रामीणों का आरोप है कि शुरुआती दौर से ही वे घटिया निर्माण और अनियमितताओं का विरोध करते रहे हैं, लेकिन विभाग ने अब तक उनकी आवाज को नजरअंदाज किया है।
फिलहाल गोदरमा गांव में इस मुद्दे को लेकर लोगों में भारी आक्रोश है और सभी की निगाहें अब प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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