सुरक्षित बचपन अभियान के अंतर्गत जागरूकता शिविर का आयोजन , अधिकार का हनन हो तो कानून का सहारा ले।संतोष पाण्डेय।

मेदिनीनगर (पलामू)

झालसा के दिशा निर्देश व पलामू के प्रधान जिला व सत्र न्यायाधीश राधा कृष्ण के मार्गदर्शन में सोमवार को सदर प्रखंड के कस्तूरबा गाँधी आवासीय विद्यालय में सुरक्षित बचपन अभियान के अंतर्गत जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।बिदित हो कि यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम 2012 पर अखिल भारतीय विद्यालय जागरूकता अभियान 26 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक आयोजित किया जाना है के अंतर्गत अभियान का शुभारंभ जिले में किया गया। इसके अंतर्गत कस्तूरबा गाँधी आवासीय विद्यालय सदर में बाल अधिकारों ,बाल संरक्षण व बाल हिंसा व बाल यौन शोषण व उपलब्ध कानूनी प्रावधानों पर कार्यक्रम आयोजित किया गया।इस मौके पर एल ए डी सी के डिप्टी चीफ संतोष कुमार पांडेय ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा उनके अधिकारों और यौन अपराधों से बचाव के लिए पोक्सो कानून और कई कानून हैं।18 बर्ष से कम आयु के सभी व्यक्तियों को बालक माना गया है।यह लड़के व लड़की दोनों पर समान रूप से लागू होता हैं।उन्होंने कहा कि जिन बच्चों की संरक्षण की जरूरत है उनके लिए प्रत्येक जिले में बाल कल्याण समिति का गठन किया गया हैं।उन्होंने कहा कि 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार प्राप्त है।उन्होंने कहा कि हर बच्चे को हिंसा दुर्व्यवहार ओर उपेक्षा से सुरक्षित रहने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि यदि बच्चों के अधिकारों का हनन होता है या उनके साथ कोई यौन अपराध होता है तो कानून का सहारा लें। ऐसे मामले में तत्काल शिकायत दर्ज कराए।उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को जैसे ही अपराध का पता चले पुलिस या चाइल्डलाइन को सूचना देना कानून रूप से जरूरी है। पुलिस पोक्सो के मामले में एफआईआर दर्ज करने से मना नहीं कर सकती ।उन्होंने कहा कि पीड़ित बच्चे का नाम पता स्कूल या फोटो किसी भी मीडिया या सोशल मीडिया पर उजागर करना पूरी तरह प्रतिबंधित है ।उन्होंने कहा कि बच्चों का बयान दर्ज करते समय पुलिसकर्मी सिविल ड्रेस बिना वर्दी में होते हैं और बयान बच्चों की सहूलियत वाली जगह जैसे उसके घर पर ही लिया जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामले की सुनवाई कोर्ट में बंद कमरे में होती है ताकि बच्चा सुरक्षित और सहज महसूस कर सके।उन्होंने कहा कि पीड़ित बच्चों को जिला विधिक सेवा प्राधिकार के माध्यम से सरकार के तरफ से मुक्त वकील प्रदान किया जाता है ।साथ ही बाल कल्याण समिति और कोर्ट के माध्यम से पीड़ित बच्चों के शारीरिक और मानसिक पुनर्वास के लिए अंतरिम और अंतिम वित्तीय मुआवजा का प्रावधान है । इस मौके पर एल ए डी सी के असिस्टेंट उत्तम कुमार ने कहा कि किसी प्रकार के बाल शोषण या आपातकालीन स्थिति में चाइल्डलाइन या राष्ट्रीय पुलिस हेल्पलाइन या स्थानीय थाना से संपर्क करें।उन्होंने कहा कि बच्चे से गन्दी बाते करना अश्लील इशारे,पीछा करना या ऑनलाइन परेशान करना यौन उत्पीड़न के अंतर्गत अपराध हैं।इस मौके पर कुमारी नीतू सिंह, पीएलवी विनय प्रसाद ने भी बाल संरक्षण व बाल अधिकार पर विस्तार से चर्चा किया।साथ ही गुड़ टच व बैड टच के बारे मे बच्चीयों को जानकारी दी।कहा कि बच्चियों को सभ्य समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका है।मौके पर पीएलवी प्रमोद रंजन दास गुप्ता, विकास कुमार तिवारी, शैलेश कुमार पासवान, सपोर्ट पर्सन रुद्रनारायण श्रीवास्तव,वार्डन प्रीति कुमारी, वर्षा कुमारी, रूबी कुमारी,राजा राम पाल,रूपा मेहरा, रागिनी रंजन,संधि सुधा,कुमारी रीति बाला,चंदा कुमारी के अलावे दर्जनों छात्राएं उपस्थित थे।

Leave a Reply