बारियातू (लातेहार)
रमजान के पाक महीने के अंतिम जुमा अलविदा की नमाज शुक्रवार को प्रखंड मुख्यालय सहित क्षेत्र के सभी मस्जिदों में बड़ी अकीदत और एहतराम के साथ अदा की गई। अलविदा जुमा को अरबी में जमात-उल-विदा’ भी कहा जाता है, जिसका मुस्लिम समाज में विशेष महत्व है।प्रखंड मुख्यालय स्थित जामा मस्जिद के अलावा डाढ़ा के रत्नादाग मस्जिद, फुलसू के जामा मस्जिद एवं बेलाल मस्जिद, गोनिया के नावाडीह मस्जिद, शिबला, इटके, साल्वे समेत अन्य मस्जिदों में दोपहर 1 बजे से 1:30 बजे के बीच नमाज अदा की गई। इस दौरान बड़ी संख्या में रोजेदारों ने नमाज अदा कर मुल्क में अमन-चैन, भाईचारा और खुशहाली की दुआ मांगी।नमाज से पूर्व सभी मस्जिदों के इमामों ने रमजान महीने की अहमियत, जकात और फितरा के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इटके जामा मस्जिद के इमाम मौलाना हाफिज शमसाद ने कहा कि रमजान रहमत और बरकत का महीना है, जो इंसान को परहेजगारी और नेक रास्ते पर चलने की सीख देता है। उन्होंने बताया कि रोजा न केवल इबादत है, बल्कि यह इंसान को शारीरिक और मानसिक रूप से भी शुद्ध बनाता है तथा कई बीमारियों से बचाव में सहायक होता है।
उन्होंने आगे कहा कि इस्लाम की बुनियाद पांच स्तंभों पर टिकी है, जिनमें रोजा एक अहम स्तंभ है। रमजान के पूरे महीने रोजा रखने से इंसान रूहानी ताकतों के करीब पहुंचता है और बुरी आदतों से दूर रहता है।रमजान के पाक महीने में जकात और फितरा निकालना भी विशेष महत्व रखता है। जकात उन लोगों पर फर्ज है जिनके पास पर्याप्त संपत्ति है, जबकि फितरा हर सक्षम व्यक्ति पर वाजिब होता है। इसका उद्देश्य समाज के गरीब और जरूरतमंद लोगों को भी ईद की खुशियों में शामिल करना है।
मौलानाओं ने अपील की कि सभी लोग जकात और फितरा निकालकर जरूरतमंदों की मदद करें, ताकि हर कोई ईद का पर्व खुशी और आपसी भाईचारे के साथ मना सके।

