बरियातू – हिंदू नव वर्ष विक्रम संवत 2083 के पावन अवसर शोभा यात्रा निकाली गई।

बारियातू (लातेहार)

बारियातू प्रखंड मुख्यालय स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर बारियातू हर्षोल्लास के साथ हिंदू नव वर्ष 2083 के पावन अवसर पर गुरुवार को वर्ष प्रतिपदा उत्सव कार्यक्रम मनाया गया। इस अवसर पर विद्यालय के समिति सदस्य एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पलामू विभाग के विभाग संघचालक जानकी नंदन राणा पलामू विभाग के विभाग निरीक्षक अखिलेश कुमार लातेहार बाजार के प्रधानाचार्य उत्तम कुमार मुखर्जी विद्यालय समिति कोषाध्यक्ष पवन कुमार समिति सदस्य बजरंग प्रसाद सत्येन्द्र प्रसाद स्थानीय विद्यालय के प्रधानाचार्य जितेन्द्र राम ने संयुक्त रूप से मां सरस्वती ओउम् एवं भारत माता के तस्वीर के समीप दीप प्रज्वलन एवं पुष्पार्चन कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई। शोभायात्रा में भारत माता की झांकी निकाली गई। बड़े ही उत्साह के साथ इस शोभा यात्रा में भैया एवं बहनों ने भाग लिया नववर्ष पर भैया/ बहनों के द्वारा पथ संचलन विद्यालय से प्रारंभ होकर बारियातू बाजार, मेन रोड़ होते हुए पुनः विद्यालय में वापस लौट आया। इस दौरान रास्ते में नववर्ष मंगलमय हो ,भारत माता की जय, वंदे मातरम के नारों से संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो गया। अपने विभाग निरीक्षक एवं विभाग संघचालक दोनों अधिकारियों ने कार्यक्रम में भैया/ बहनों को संबोधित किया। विभाग निरीक्षक कुमार ने भैया बहनों को संबोधित करते हुए कहा कि इस तरह का कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में भारतीय संस्कृति ,धर्म परंपराओं और नैतिक मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है इस प्रकार के कार्यक्रम से बच्चे अपने इतिहास से अवगत होते हैं। बच्चों के अंदर स्व का बोध उत्पन्न होता है। राष्ट्रभक्ति का भाव उत्पन्न होता है। उनके माध्यम से नव वर्ष की शुभकामनाएं सभी भैया/ बहनों को दी गई ‌। वहीं विभाग संघचालक जानकी नंदन राणा ने अपने संबोधन में कहा कि हमारा नव वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाता है। इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी। इसी दिन उज्जैन के राजा विक्रमादित्य ने शकों को हराकर राष्ट्र को मुक्ति दिलाई थी। और विक्रम संवत की शुरुआत की थी। यह वसंत ऋतु का समय होता है जब प्रकृति में नई ऊर्जा आती है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक परम पूज्य डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार जी के जीवनी पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि उनके अंदर जन्मजात राष्ट्रभक्ति का भाव था। उन्होंने वंदे मातरम जय घोष पर प्रतिबंध रहते हुए भी एक अंग्रेज अधिकारी को वंदे मातरम की जय की नारो से स्वागत किया था। कार्यक्रम को सफल बनाने में सभी आचार्य जी और दीदी जी का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इस अवसर पर काफी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित थे।

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