नावाबाजार (पलामू )
पलामू जिले के नावाबाजार प्रखंड मुख्यालय में सुबह का समय हो या देर शाम, एक कमरा ऐसा है जहां लोगों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। कोई अपनी जमीन से जुड़ी समस्या लेकर आता है, तो कोई योजना का लाभ पाने की उम्मीद में। कोई शिकायत करता है, तो कोई सलाह मांगता है। इन सबके बीच एक शांत, संयमित और मुस्कुराता चेहरा सबकी बातें ध्यान से सुनता है, यह हैं नावाबाजार की प्रखंड विकास पदाधिकारी रेनू बाला।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जब महिलाओं की उपलब्धियों की चर्चा होती है, तो नावाबाजार की यह तस्वीर अपने आप में एक प्रेरक कहानी बन जाती है।
रेनू बाला के कंधों पर केवल बीडीओ की जिम्मेदारी ही नहीं है, बल्कि अंचल अधिकारी और विश्रामपुर बाल विकास परियोजना पदाधिकारी का भी अतिरिक्त प्रभार है। तीन तीन महत्वपूर्ण पदों का कार्यभार किसी भी अधिकारी के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन रेनू बाला इसे सहजता और समर्पण के साथ निभा रही हैं।
काम की गंभीरता और जिम्मेदारी को देखते हुए उन्होंने प्रखंड मुख्यालय परिसर में बने आवासीय भवन को ही अपना घर बना लिया है। यहीं से वह दिन रात प्रखंड, अंचल और बाल विकास से जुड़े कार्यों की निगरानी करती हैं। इससे लोगों को भी यह भरोसा रहता है कि उनकी समस्या सुनने वाला अधिकारी यहीं मौजूद है।
लेकिन उनकी असली पहचान केवल पद या जिम्मेदारी नहीं, बल्कि उनका व्यवहार है। कार्यालय आने वाले लोगों से वह बड़ी आत्मीयता से मिलती हैं। खासकर जब कोई युवा अपनी समस्या लेकर आता है, तो वह उसे मुस्कुराकर “बउवा” कहकर संबोधित करती हैं। यह अपनापन लोगों को तुरंत सहज कर देता है। वह धैर्यपूर्वक उनकी बातें सुनती हैं और समाधान के लिए संबंधित कर्मचारियों को स्पष्ट दिशा निर्देश देती हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासनिक पद पर बैठकर भी इतनी सरलता और अपनापन कम ही देखने को मिलता है। उनके कार्यकाल में नावाबाजार प्रखंड, अंचल कार्यालय और विश्रामपुर बाल विकास परियोजना से जुड़े काम अपेक्षाकृत व्यवस्थित तरीके से संचालित हो रहे हैं।
महिला दिवस के मौके पर रेनू बाला की यह कार्यशैली इस बात का उदाहरण है कि नेतृत्व केवल पद से नहीं, बल्कि संवेदनशीलता, जिम्मेदारी और लोगों से जुड़े रहने की भावना से मजबूत होता है। नावाबाजार में उनकी मौजूदगी कई लोगों के लिए भरोसे और प्रेरणा की कहानी बन चुकी है।

