ग्रामीण समुदाय तक निःशुल्क विधिक सहायता पहुँचा रहे DRISTI स्वयंसेवक

जमीनी स्तर पर न्याय तक पहुँच सुनिश्चित करने की दिशा में एक सराहनीय पहल करते हुए, DRISTI स्वयंसेवकों ने न्याय शास्त्र के सहयोग से राजकीयकृत प्राथमिक विद्यालय पंचौली (पूर्व मेसरा) गाँव में निःशुल्क विधिक सहायता एवं विधिक जागरूकता कार्यक्रम “न्यायदिशा-न्याय की ओर एक कदम” का सफल आयोजन किया। यह कार्यक्रम सह-संस्थापक शुभांशु शेखर शुक्ला के मार्गदर्शन एवं दृष्टि तथा चैप्टर लीड आदित्य सुनार के नेतृत्व में संपन्न हुआ। इस पहल का उद्देश्य समाज के वंचित वर्गों को उनके मौलिक कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करना और बिना किसी शुल्क के विधिक सहायता प्रदान कर उन्हें सशक्त बनाना था।

DISHA (दिशा), DAKSHA (दक्षता) और DIKSHA (शिक्षा एवं जागरूकता) के मूल स्तंभों से प्रेरित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण समुदायों और विधिक प्रणाली के बीच की खाई को पाटना था। स्वयंसेवकों ने ग्रामीणों से सीधे संवाद स्थापित कर सरल और सहज भाषा में महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी तथा बिना किसी आर्थिक बोझ के मूलभूत निःशुल्क विधिक परामर्श प्रदान किया। सत्र के दौरान समुदाय द्वारा प्रतिदिन सामना की जाने वाली कानूनी समस्याओं पर चर्चा की गई, जिससे लोगों को अपने अधिकारों और कर्तव्यों की बेहतर समझ मिल सकी। कई ग्रामीणों के लिए यह कार्यक्रम विधिक पेशेवरों के साथ पहला सार्थक संवाद था, जिसने न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास और आत्मविश्वास को बढ़ावा दिया। इस पहल का प्रभाव लाभार्थियों की सकारात्मक प्रतिक्रिया और आभार व्यक्त करने से स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। कार्यक्रम ने न केवल विधिक ज्ञान का प्रसार किया, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व, सामुदायिक सशक्तिकरण और समावेशी न्याय के मूल्यों को भी सुदृढ़ किया।

इस कार्यक्रम के सफल संचालन में पियूष श्रीवास्तव, तनु कुमारी, यशिका अग्रवाल, आशिका कुमारी, शिवांगी तिवारी, मोहित कुमार सहित अन्य समर्पित स्वयंसेवकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके सामूहिक प्रयासों ने सेवा, संवेदना और समाज उत्थान के प्रति DRISTI की सतत प्रतिबद्धता को उजागर किया।

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