बरवाडीह (लातेहार)
झारखंड के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल और जैव विविधता से भरपूर बेतला नेशनल पार्क में पिछले कई महीनों से स्थायी रेंजर के अभाव में प्रभार व्यवस्था के सहारे काम चलाया जा रहा है। इसके साथ पार्क के अंदर करोड़ो रुपये की चल रही है जिसमे बिचौलिया हावी है इसका सीधा असर न सिर्फ वन प्रबंधन पर पड़ रहा है, बल्कि वन क्षेत्र से जुड़े ग्रामीणों और पर्यटकों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रभार व्यवस्था के चलते वन कर्मियों की मनमानी बढ़ गई है और जवाबदेही लगभग खत्म हो चुकी है। बताया जाता है कि बेतला नेशनल पार्क जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में स्थायी रेंजर की नियुक्ति नहीं होने से प्रशासनिक नियंत्रण कमजोर पड़ा है। प्रभार में काम कर रहे रेंजर उमेश दुबे सीमित समय के कारण क्षेत्र की समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। इसका फायदा उठाकर बिचोलिया कुछ वन कर्मी अपने स्तर पर फैसले लेने लगे हैं, जिससे आम लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि जंगल से सटे गांवों में रहने वाले लोगों को छोटी-छोटी बातों पर परेशान किया
रहा है। वही पर्यटन के क्षेत्र में भी इसका नकारात्मक असर दिख रहा है। बेतला नेशनल पार्क में हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं, लेकिन हाल के महीनों में अव्यवस्था के कारण पर्यटकों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। कभी गाइड की मनमानी, तो कभी टाइगर सफारी चालक की मनमानी चलती है जिसे टूरिस्ट परेशान हो जाते है। वही
वन्यजीव संरक्षण के दृष्टिकोण से भी यह स्थिति चिंताजनक मानी जा रही है। वन कर्मी सूत्र का कहना है कि जब तक स्थायी और ईमानदार रेंजर की नियुक्ति नहीं होती, तब तक दीर्घकालिक संरक्षण योजनाओं पर प्रभावी ढंग से काम करना मुश्किल है। गश्ती, निगरानी और संरक्षण से जुड़े कई अहम निर्णय टलते जा रहे हैं, जिसका नुकसान जंगल और वन्यजीव दोनों को हो सकता है।
स्थानीय सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने मंत्री सुदिब्य कुमार सोनू से मांग की है कि बेतला नेशनल पार्क में शीघ्र ही स्थायी रेंजर की नियुक्ति की जाए। साथ ही वन कर्मियों की कार्यप्रणाली पर सख्त निगरानी रखी जाए, ताकि मनमानी और बिचौलिया पर अंकुश लग सके।

