मेदिनीनगर (पलामू)
झालसा के दिशा निर्देश व पलामू जिला के प्रधान न्यायाधीश राम शर्मा के मार्गदर्शन में व जिला विधिक सेवा प्राधिकार के तत्वाधान में शुक्रवार को उप विकास आयुक्त के सभागार में मोटर दुर्घटना दावा अधिनियम के तहत एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य आम लोगों को मोटर दुर्घटनाओं के बाद कानूनी अधिकार, मुआवजा प्राप्ति की प्रक्रिया तथा सड़क सुरक्षा से जुड़े नियमों की जानकारी देनी थी ।साथ ही इस सम्बंध में माननीय उच्चतम न्यायालय व उच्च न्यायालय के द्वारा दिये गए बिभिन्न निर्देशो से भी सभी अनुसंधान कर्ताओ को अवगत कराना था।कार्यशाला का उद्घाटन पलामू जिला ब्यवहार न्यायालय के जिला व सत्र न्यायाधीश षष्टम राजकुमार मिश्रा, जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव राकेश रंजन, सदर एसडीपीओ मणि भूषण प्रसाद ने संयुक्त रूप से द्वीप प्रज्ज्वलित कर किया ।कार्यशाला में अधिवक्ता, एल ए डी सी में कार्यरत अधिवक्ता पीएलबी के अलावे जिले के बिभिन्न थाना के पुलिस अधिकारी शामिल थे ।इस मौके पर जिला व सत्र न्यायाधीश षष्टम राजकुमार मिश्रा ने कहा कि मोटर दुर्घटनाओं में पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए कानूनी प्रक्रिया को सरल बनाया गया है ।उन्होंने बताया कि दुर्घटना की स्थिति में छह माह के भीतर दावा करना अनिवार्य है ।हिट एंड रन मामले में भी मुआवजा देने की स्पष्ट व्यवस्था है ।उन्होंने कहा कि यदि दुर्घटना सरकारी वाहन से होती है तो राज्य सरकार पूर्ण मुआवजा प्रदान करती है।उन्होंने कहा कि छह माह के अंदर कम्पनशेषन का केस करना अनिवार्य है।उन्होंने कहा कि हिट एंड रन के मामले में ज़ख्मी होने पर 50 हजार रूपये व मृत्यु होने पर दो लाख का मुआवजा डीटीओ कार्यालय से दिया जाता है। इस मौके पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव राकेश रंजन ने कहा कि एफ ए आर फर्स्ट एक्सीडेंट रिपोर्ट फॉर्म ए में भरा जाता है ।वही 10 दिन के अंदर फॉर्म दो तैयार करना है ओर उसकी कॉपी विक्टिम को भी देना है। साथ ही फार्म तीन ड्राइवर से सम्बंधित फॉर्म है । इसको भर कर 30 दिन के अंदर देना पड़ता है ।फॉर्म चार ऑनर से संबंधित है इसे भी 30 दिन के अंदर भरकर देना है।वही फॉर्म पांच इंटरिम एक्सीडेंट रिपोर्ट है जो 50 दिन के अंदर देना सम्बंधित टियूबनल में जमा कर देना है। फॉर्म 6 b विक्टिम से सम्बंधित हैं जिसे भरकर अनुसन्धान कर्ता को दिया जाता है जो 60 दिन के अंदर जमा करना अनिवार्य है। वही डिटेल एक्सीडेंट रिपोर्ट फॉर्म सात भरकर टियूबनल में जमा करना है। इस मौके पर सदर एसडीपीओ मणि भूषण प्रसाद ने कहा कि तेज रफ्तार और शराब हादसे के बड़े कारण हैं ।सड़क हादसों के मुख्य कारण पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अधिकतर दुर्घटनाएं तेज रफ्तार के कारण होती है।व शराब सेवन के कारण भी हादसे में बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि दुर्घटना के बाद पहले गोल्डन आवर में जख्मी का सही इलाज मिलना अत्यंत आवश्यक है ।उन्होंने हिट एंड रन की जानकारी दी।साथ ही कहा कि यदि कोई व्यक्ति किसी घायल को अस्पताल पहुंचाता है तो उसे इनाम दिया जाता है ।साथ ही उसे पुलिस या अदालत में परेशान नहीं किया जाता है ।इसके अतिरिक्त सरकार द्वारा घायल को 50 हजार तक का निशुल्क इलाज देने की व्यवस्था भी की गई है।इस मौके पर अधिवक्ता सी के मिश्र ने कहा कि मोटर दुर्घटना केस में अनुसंधानकर्ता का रोल बहुत महत्वपूर्ण होता है ।उन्होंने कहा कि अनुसंधानकर्ता के लापरवाही से बड़ा दावा भी कभी-कभी नहीं मिल पाता है। उन्होंने कहा कि जहां तक सामाजिक सुरक्षा की बात है तो सामाजिक सुरक्षा के जिम्मेवारी सरकारी बीमा कंपनियों की होती है ।पुलिस की ड्यूटी होती है कि वह आवेदन पर वाहन मालिक को कोर्ट में प्रस्तुत करें ताकि मामले में निपटने में अनावश्यक बिलम्ब ना हो और कोर्ट का भी समय बर्बाद ना हो ।साथ ही उचित मुआवजे की राशि समय पर मिल सके। इस मौके पर लीगल या डिफेंस काउंसिल के के अमिताभ चंद्र सिंह, डिप्टी चीफ संतोष कुमार पांडेय, असिस्टेंट वीर विक्रम वक्स राय,उत्तम कुमार ,अधिवक्ता देव कुमार शुक्ला, वीरेंद्र राम, विनोद कुमार, सुरेश राम ,सुशील उरांव ,सुबोध कुमार ,विकास कुमार तिवारी , बसन्त कुमार दुबे,इंद्रजीत प्रजापति, जाहिद हुसैन ,शिवप्रसाद महतो ,राजू कुमार गुप्ता ,विवेक कुमार ,प्रेम नारायण रजक ,विकास कुमार प्रिया कुमारी, रविशंकर शुक्ल ,अमित कुमार विश्वकर्मा के अलावे दर्जनों अधिवक्ता पुलिसकर्मी उपस्थित थे।

