E20 पेट्रोल से क्यों बढ़ी चीनी की कीमत? जानिए पेट्रोल से चीनी का कनेक्शन और किन चीजों पर पड़ा असर

रांची (झारखंड)

सोचिए, आप पेट्रोल भरवाने जाते हैं और वहां E20 लिखा देखकर शायद यही सोचते हैं कि इसका असर सिर्फ आपकी गाड़ी के इंजन या माइलेज पर होगा. लेकिन इसकी कहानी सिर्फ पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं है. भारत में पेट्रोल में 20 फीसदी तक एथेनॉल मिलाने की नीति ने एक तरफ देश की तेल पर निर्भरता कम करने में मदद की है, तो दूसरी तरफ अब इसका रिश्ता रसोई में इस्तेमाल होने वाली चीनी की कीमत से भी जोड़ा जा रहा है. यही वजह है कि जब चीनी के दाम तेजी से बढ़े, तो E20 और गन्ने से एथेनॉल बनाने की नीति पर बहस तेज हो गई.

हालांकि, पूरी तस्वीर थोड़ी अलग है. चीनी के दाम बढ़ने के पीछे सिर्फ एथेनॉल नहीं है. इस साल गन्ने का उत्पादन उम्मीद से कम रहने, कई राज्यों में मौसम की मार और चीनी के स्टॉक में कमी ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया है. ऐसे में सवाल यह है कि E20 का चीनी की कीमत से आखिर कनेक्शन क्या है और इसका असर आम लोगों की जेब पर कैसे पड़ रहा है.

E20 पेट्रोल आखिर है क्या?

E20 का मतलब है कि पेट्रोल में 20 फीसदी तक एथेनॉल मिलाया जाता है. एथेनॉल एक तरह का जैव ईंधन है, जिसे भारत में मुख्य रूप से गन्ने और अनाज जैसे कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है.

भारत ने पेट्रोल में एथेनॉल की मिलावट लगातार बढ़ाई है. सरकार के मुताबिक 2013-14 में एथेनॉल ब्लेंडिंग 1.5 फीसदी से भी कम थी, जो 2025-26 में 20 फीसदी तक पहुंच गई. सरकार का उद्देश्य पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता घटाना, किसानों के लिए अतिरिक्त बाजार तैयार करना और देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना है.

यहीं से चीनी और पेट्रोल की कहानी आपस में जुड़ती है.

गन्ने से चीनी बने या एथेनॉल?

गन्ने का इस्तेमाल सिर्फ चीनी बनाने के लिए नहीं होता. गन्ने के रस और उससे निकलने वाले विभिन्न उत्पादों से एथेनॉल भी तैयार किया जा सकता है.

जब चीनी मिलें गन्ने के एक हिस्से को एथेनॉल बनाने में इस्तेमाल करती हैं, तो उतनी मात्रा में गन्ना सीधे चीनी उत्पादन में नहीं जाता. सामान्य स्थिति में इससे चीनी की उपलब्धता पर कुछ दबाव पड़ सकता है.

लेकिन यहां एक जरूरी बात है. हालिया विश्लेषणों के मुताबिक इस समय चीनी की कीमतों में तेजी का मुख्य कारण सिर्फ एथेनॉल के लिए गन्ने का इस्तेमाल नहीं है. महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में मौसम की स्थिति ने उत्पादन को प्रभावित किया. उत्तर प्रदेश में भी फसल को बीमारी और कीटों से नुकसान पहुंचा. इससे कुल चीनी उत्पादन और उपलब्ध स्टॉक पर दबाव आया.

चीनी के दाम क्यों बढ़े?

2026 में चीनी बाजार में तेजी काफी तेज रही है. जुलाई में खुदरा चीनी की कीमत करीब 45 रुपये प्रति किलो थी, जो अगस्त में बढ़कर लगभग 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई.

थोक बाजार में भी कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिला. कोल्हापुर जैसे प्रमुख चीनी बाजार में अगस्त की शुरुआत से कीमतों में करीब 20 फीसदी की तेजी दर्ज की गई.

इस तेजी के पीछे तीन बड़े कारण समझे जा सकते हैं.

पहला, गन्ने और चीनी का उत्पादन अनुमान से कम रहना.

दूसरा, चीनी का घरेलू स्टॉक कम होना.

तीसरा, एथेनॉल के लिए गन्ने और चीनी से जुड़े कच्चे माल का इस्तेमाल.

इसके अलावा त्योहारी सीजन करीब आने से चीनी की मांग बढ़ने की संभावना ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई है

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