मेदिनीनगर (पलामू)
डायन कुप्रथा सभ्य समाज के लिए अभिशाप हैं। इसे मिटाने के लिए सबका साथ जरूरी हैं।यह अंधविश्वास हैं।व अंधविश्वास समाज को खोखला कर रहा है।उक्त बातें नव नियुक्त अपर जिला व सत्र न्यायाधीश ज्योति शील ने कही। वे झालसा के दिशा निर्देश व पलामू के प्रधान जिला व सत्र न्यायाधीश श्री राम शर्मा के मार्गदर्शन मे बुधवार को छतरपुर प्रखंड के खजूरी नौडीहा पंचायत सचिवालय में डायन बिसाही बिषय पर आयोजित विधिक जागरूकता शिविर में बतौर मुख्य अतिथि सम्बोधित कर रही थी।इसके पूर्व कार्यक्रम का उद्घाटन डालसा अपर जिला व सत्र न्यायाधीश ज्योति शील, डालसा सचिव राकेश रजंन ,छतरपुर के प्रखंड विकास पदाधिकारी आशिष कुमार,छतरपुर थाना प्रभारी सौरभ चौबे,महिला थाना प्रभारी रूपा बाखला, लीगल एड डिफेंस काउंसिल के डिप्टी चीफ संतोष कुमार पांडेय ने संयुक्त रूप से द्वीप प्रज्ज्वलित कर किया।इस मौके पर अतिथियों का स्वागत गुलदस्ता भेटकर किया गया।मौके पर श्रीमती शील ने कहा कि डायन कुप्रथा से न केवल महिलाओं में बल्कि समाज मे भी नकारात्मक विचार धारा बन रही हैं।इस मौके पर डालसा सचिव राकेश रंजन ने कहा कि कमजोर व असहाय महिलाओं को डायन बताकर प्रताड़ित करने की कुप्रथा के कारण कई बार स्थिति भयावह हो जाती हैं।ऐसी घटनाओं के पीछे किसी न किसी का स्वार्थ छुपा रहता हैं।ऐसे लोगो को पहचान करने की जरूरत है।बीडीओ आशीष कुमार ने कहा कि डायन के नाम पर किसी महिला को प्रताड़ित करना अशिक्षित समाज को दर्शाता हैं। लीगल एड डिफेंस काउंसिल के डिप्टी चीफ संतोष कुमार पांडेय ने कहा कि डायन बिसाही के मामले में पुरूष से ज्यादा महिलाएं शिकार होती हैं।उन्होंने कहा कि किसी महिला को डायन घोषित करने के पीछे अधिकांशतः मामले में साजिश होता हैं।पुराने रंजिश से झगड़ा के कारण उसके गांव या उसके जानने वाले ही डायन होने का अफवाह फैलाते है।उन्होंने कहा कि ऐसे लोगो को दंडित करने के लिए डायन प्रथा प्रतिषेध अधिनियम 2001 का प्रावधान किया गया है।इसके तहत कोई भी ब्यक्ति किसी की पहचान डायन के रुप मे करता है तो उसे तीन महीने की जेल सहित जुर्माना देना होगा।साथ ही डायन कहकर महिला को प्रताड़ित करता हैं तो छह माह तक जेल व जुर्माना देना पड़ेगा।इस मौके पर थाना प्रभारी सौरभ चौबे ने कहा कि झाड़ फुक या टोटका से उपचार करने वाले ओझा या तांत्रिक भी कानूनी करवाई से नही बच सकते।उन्हें भी जेल की हवा खानी पड़ेगी।यह अशिक्षा व अज्ञानता हैं।महिला थाना प्रभारी रूपा बाखला ने कहा कि शिक्षा के कमी और जागरूकता के अभाव के कारण डायन कुप्रथा आज भी समाज मे मौजूद है। जिसके कारण कई मासूम महिलाओं की जान चली जाती हैं।उन्होंने कहा कि यह जागरूकता से ही मिटेगा। कहा कि लोग डायन बिसाही के चक्कर मे पड़कर इलाज नही करा पाते हैं।उन्होंने कहा कि गांव कि कमजोर विधवा व परित्यक्ता महिला को लोग डायन बोलकर प्रताड़ित करते हैं इसके पीछे का कारण उसके सम्पति को लूटना हैं।इस मौके पर बीएनएस लॉ कॉलेज की छात्रा नेहा पाण्डेय ने कहा कि जुर्म करे नही व जुर्म सहे नही।जरूरत पड़े तो डालसा का दरवाजा खटखटाये यहाँ आपको निःशुल्क बिधिक सहायता उपलब्ध कराया जाता हैं उन्होंने कहा कि महिलाएं अगर जागरूक हो गई तो समाज मे क्रांति ला सकती हैं।उन्होंने कहा कि महिलाएं पर हिंसा हो तो आप सजग रहिये।गलत का हमेशा बिरोध कीजिये।उन्होंने महिला हिंसा के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि महिलाओं को भी समाज मे बराबरी का दर्जा प्राप्त है।उनके साथ किसी प्रकार का भेदभाव नही किया जा सकता। कार्यक्रम का संचालन लीगल एड डिफेंस काउंसिल के डिप्टी चीफ संतोष कुमार पाण्डेय व धन्यवाद मुखिया हरेंद्र सिंह ने किया। इस मौके पर बीएनएस लॉ कॉलेज के छात्र आषुतोष कुमार,अंजलि कुशवाहा पीएलवी असरेश कुमार मोची, पवन कुमार प्रजापति,संतोष कुमार मेहता,ओम प्रकाश यादव ,अनिता देवी ,सकुन्ती देवी संतोषी देवी,किरण देवी,रीना देवी,वीना देवी,पूनम देवी,माया देवी देवी,शकुंतला देवी,शांति,देवी समेत सैकड़ो लोग उपस्थित थे।

