विश्रामपुर (पलामू)
पलामू जिले के 251 बर्खास्त अनुसेवकों का संघर्ष अब केवल प्रशासनिक या कानूनी मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह राज्यव्यापी सामाजिक और मानवीय संकट का रूप ले चुका है। अपने समायोजन और पुनः नियुक्ति की मांग को लेकर सभी अनुसेवक 3 जनवरी को पलामू से पदयात्रा पर निकले थे, जो 8 जनवरी को राजधानी रांची पहुंचे।
इस लगभग 200 किलोमीटर लंबी पदयात्रा के दौरान अनुसेवकों को भयंकर ठंड, भूख, थकान और इलाज के अभाव जैसी गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ा। आंदोलन के दौरान दो अनुसेवकों की मौत हो जाना इस संघर्ष की भयावहता को उजागर करता है, जिसने सरकार और समाज दोनों को झकझोर कर रख दिया है।
2010 की नियुक्ति, सुप्रीम कोर्ट का आदेश और बर्खास्तगी
यह मामला वर्ष 2010 में ग्रेड-4 पदों पर हुई नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़ा है, जिसे बाद में अवैध करार दिया गया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में वर्षों तक सेवा देने वाले इन अनुसेवकों को नौकरी से हटा दिया गया। अचानक रोजगार छिन जाने से सैकड़ों परिवार आर्थिक तंगी, भुखमरी और इलाज के अभाव से जूझने को मजबूर हैं।
अनुसेवकों से मिले सुधीर कुमार चंद्रवंशी
रांची पहुंचने के बाद विश्रामपुर विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी सुधीर कुमार चंद्रवंशी स्वयं मौके पर पहुंचे और सभी अनुसेवकों से मुलाकात कर उनकी पीड़ा सुनी। अनुसेवकों ने बताया कि वे न्याय की उम्मीद में घर-परिवार छोड़कर पैदल चलने को मजबूर हुए हैं।
“यह लड़ाई नौकरी नहीं, जीवन और सम्मान की है”
इस अवसर पर सुधीर कुमार चंद्रवंशी ने कहा,
“251 अनुसेवकों की यह लड़ाई केवल नौकरी की नहीं, बल्कि जीवन और सम्मान की लड़ाई है। आंदोलन के दौरान दो साथियों की मृत्यु यह दर्शाती है कि हालात कितने गंभीर हैं। सरकार को संवेदनशीलता दिखाते हुए तत्काल समाधान निकालना चाहिए।”
उन्होंने झारखंड के माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मांग की कि बर्खास्त अनुसेवकों के मामले का शीघ्र निराकरण करते हुए समायोजन के माध्यम से पुनः नियुक्ति दी जाए, ताकि सैकड़ों परिवारों को राहत मिल सके।
कांग्रेस आंदोलन के साथ: चंद्रवंशी
सुधीर चंद्रवंशी ने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी और वे स्वयं इस आंदोलन के साथ मजबूती से खड़े हैं और जब तक अनुसेवकों को न्याय नहीं मिलता, तब तक यह आवाज़ बुलंद की जाती रहेगी।

