मेदिनीनगर (पलामू)
आषाढ़ पूर्णिमा को जिसे हम गुरु पूर्णिमा के नाम से जानते हैं। आषाढ़ पूर्णिमा के ही दिन भगवान बुद्ध ज्ञानार्जन के बाद पहला उपदेश सारनाथ में दिए थे। वेद के रचयिता महर्षि वेद ब्यास का जन्म आषाढ़ पूर्णिमा को ही हुआ था जिसे आषाढ़ पूर्णिमा का विशेष महत्व है। भगवान शिव को भी आदि गुरु कहा जाता है,पाटन प्रखंड के लोइंगा ग्राम में गुरुभाई गुरु बहनों ने गुरुचर्चा का आयोजन किया जहां बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। वरीय गुरुभाई गोकुलानंद तिवारी जी ने संयुक्त रूप से अंग वस्त्र देकर स्वागत किए। सैकड़ों गुरु भाई,गुरु बहनों को संबोधित करते गुरु के महता पर प्रकाश डाले। हमने कहा गुरु जीवन जीने की कला व कम संसाधन में बेहतर जिंदगी बसर करने के हुनर सिखाते हैं। भगवान शिव अपने लिए कुछ नहीं बल्कि लोक कल्याणार्थ जहर भी पिये। हम प्राकृतिक संसाधनों को उतनाही संग्रहित करेंगे जिसे संतुलन बाधित न हो। हम सबों को संपत्ति के लिए हाय तौबा नहीं करना चाहिए बल्कि सामान्य के साथ समाज में रहना चाहिए। परिवार को जीवन मूल्यों के कीमत समझाइये रिश्ता को मजबूत बनाए और आने वाली पीढ़ी को नसीहत का आईना छोड़िए तभी हमारा राष्ट्र और देश मजबूत होगा। आप अंधविश्वास जादू टोना और पारलौकिक रिजर्वेशन के पीछे नहीं पड़ें। अपने बच्चों को बेहतर तालीम दें कम खा कर भी बेटियों को स्कूल भेजें। गुरु के बताए रास्ते पर चलें और अमल करें तभी हमारी मंजिल का मार्ग सुगम होगा। भगवान बुद्ध राजा का बेटा राज महल त्याग कर सत्य के खोज में निकले और दुनिया को मानवता करुणा दया के लेसन दे गए। सम्राट अशोक बुद्ध के बताए मार्ग पर चल कर मगध का सम्राट बना और दुनिया में मगध साम्राज्य का मुकुट ऊंचा किए। सैकड़ों गुरु भाई बहनों के साथ महती भूमिका में एडवोकेट ओंकार नाथ तिवारी जिन्हों ने संगीत कला से चर्चा को सुगंधित कर दिए। भाई राधे श्याम सोनी की मौजूदगी प्रबंधन को लाजवाब बनाया। आमोद भैया प्रतिमा बहन सहित सभी ने एक मुश्त चर्चा को सफ़ल बनाने में अपनी ढेर सारा समय दान किए। सभी को गुरु पूर्णिमा की ढेर सारी शुभकामनाएं मुबारकबाद बधाई। जय महादेव।

