बरवाडीह (लातेहार)
पलामू टाइगर रिजर्व द्वारा वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के सहयोग से बुधवार 11 मार्च 2026 को बेतला राष्ट्रीय उद्यान स्थित एनआईसी सम्मेलन हॉल में “बातचीत करें, संवाद करें, संरक्षण करें” थीम पर एक दिवसीय मीडिया कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य वन्यजीव संरक्षण, मानव-वन्यजीव संघर्ष और वन्यजीव अपराध से जुड़े मुद्दों पर मीडिया की भूमिका को मजबूत करना था। कार्यक्रम में वन विभाग के अधिकारियों, विशेषज्ञों तथा विभिन्न मीडिया संस्थानों से जुड़े पत्रकारों ने भाग लिया।
कार्यशाला की शुरुआत सुबह 10 बजे प्रतिभागियों के पंजीकरण और किट वितरण के साथ हुई। इसके बाद झारखंड वन्यजीव संरक्षण सोसायटी के संस्थापक श्री अभिषेक चौबे ने स्वागत भाषण देते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा और उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वन्यजीव संरक्षण के मुद्दों को समाज तक सही तरीके से पहुँचाने में मीडिया की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।इसके बाद प्रतिभागियों का परिचय सत्र आयोजित किया गया, जिसमें पत्रकारों और विशेषज्ञों ने अपना परिचय देते हुए वन्यजीव संरक्षण से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। पलामू टाइगर रिजर्व के उप निदेशक ने उद्घाटन भाषण में कहा कि वन्यजीव संरक्षण केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें समाज और मीडिया की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है।कार्यक्रम के दौरान पलामू टाइगर रिजर्व के क्षेत्र निदेशक सह मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) श्री एस.आर. नटेशा (आईएफएस) ने मुख्य भाषण दिया। उन्होंने कहा कि जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए स्थानीय समुदाय, प्रशासन और मीडिया के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। उन्होंने बताया कि पलामू टाइगर रिजर्व जैव विविधता की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है और इसके संरक्षण में सभी की सहभागिता आवश्यक है।
मुख्य अतिथि पीसीसीएफ वन्यजीव एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक(सीडब्ल्यूएलडब्ल्यू) श्री रवि रंजन(आईएफएस) डिप्टी डायरेक्टर कुमार आशीष ने अपने संबोधन में कहा कि झारखंड में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में कई महत्वपूर्ण पहल की जा रही हैं। उन्होंने मीडिया से अपील की कि वन्यजीवों से जुड़ी खबरों को जिम्मेदारी के साथ प्रस्तुत किया जाए, ताकि लोगों में संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़े और अनावश्यक भय या भ्रम की स्थिति न बने।
इसके बाद वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के परियोजना प्रमुख श्री अंकित ठाकुर ने झारखंड में हाथी गलियारों से जुड़े मुद्दों और “राइट ऑफ पैसेज” पहल पर तकनीकी प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि हाथियों के पारंपरिक मार्गों को सुरक्षित रखना मानव-हाथी संघर्ष को कम करने में बेहद अहम भूमिका निभाता है। दोपहर के सत्र में संचार विशेषज्ञ विराट सिंह ने “संघर्ष संबंधी कथाओं को आकार देने में मीडिया की भूमिका” विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं की रिपोर्टिंग करते समय संवेदनशीलता और तथ्यों की सटीकता बहुत जरूरी है। वहीं वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो के डॉ. के.के. शर्मा ने मीडिया में वन्यजीव अपराध की कवरेज के दौरान आने वाले जोखिम और जिम्मेदारियों पर प्रकाश डाला।कार्यशाला के दौरान पत्रकारों के साथ समूह अभ्यास भी कराया गया, जिसमें मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं की रिपोर्टिंग में आने वाली चुनौतियों पर चर्चा की गई। कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों से विभिन्न विषयों पर सवाल पूछे और सुझाव दिए।समापन सत्र में धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। इसके बाद प्रतिभागियों को पलामू टाइगर रिजर्व का क्षेत्र भ्रमण भी कराया गया, जिससे उन्हें वन्यजीव संरक्षण के जमीनी पहलुओं को करीब से समझने का अवसर मिला।मौके पर बेतला प्रभारी रेंजर उमेश दुबे छिपादोहर पश्चिम वन क्षेत्र पदाधिकारी अजय कुमार टोपों संतोष कुमार प्रभारी वनपाल निरंजन कुमार धिरज कुमार देवपाल भगत संतोष कुमार विवेक तिवारी फैज अहमद के साथ साथ वनरक्षि रहे उपस्थित।

