एस एन त्रिपाठी का 39 वा पुण्यतिथि मनाया गया
12 अधिवक्ता हुए सम्मनित
मेदिनीनगर (पलामू)
मेहनत सफलता का द्वार खोलता है।सफल वही होते है जो निरन्तर लगे रहते हैं।वकालत के पेशे में शॉर्टकट नही है।जो मेहनती होते है भगवान उन्हें सफलता आवश्य देते हैं।उक्त बातें पलामू के प्रधान जिला व सत्र न्यायाधीश श्री राम शर्मा ने कही।वे रविवार को स्वर्गीय एस एन त्रिपाठी के 39 वॉ पुण्यतिथि पर अधिवक्ता सम्मान समारोह में बोल रहे थे।उक्त कार्यक्रम का आयोजन अधिवक्ता संघ भवन के ऊपरी तल्ला पर अधिवक्ता शशि भूषण दुबे के द्वारा आयोजित किया गया था।कार्यक्रम का उदघाटन पीडीजे श्री राम शर्मा एडीजे अखिलेश कुमार, स्वेता ढींगरा,सीजेएम मनोरंजन कुमार, डालसा सचिव राकेश रंजन, रजिस्ट्रार कमल प्रकाश,अधिवक्ता संघ के उपाध्यक्ष विनोद तिवारी, व ट्रस्ट के संयोजक ध्रुब शंकर दुबे के द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर व स्वर्गीय एसएन त्रिपाठी के चित्र पर पुष्पांजलि कर किया गया।मौके पर अतिथियों को शॉल ओढ़ाकर व धार्मिक ग्रंथ रामायण भेट कर सम्मानित किया गया। पीडीजे श्री शर्मा ने कहा कि सेक्सेस के लिए निरंतर मेहनत करना पड़ता हैं।उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि एक जजमेंट तभी अच्छा लिखा जा सकता हैं जब अधिवक्ता पूरा मेहनत कर कोर्ट में आते हैं।मोके पर बशिष्ठ अतिथि एडीजे वन अखिलेश कुमार ने कहा कि सचिदानंद त्रिपाठी कार्य के प्रति बफादार रहे है।उनका दिल हमेशा बार की ओर था।स्वर्गीय त्रिपाठी के जीवनी से हम सभी को प्रेरणा लेनी चाहिए वे टाइम के बहुत पनचुयल थे।उनके विशेषताओ को आत्मसात करने की जरूरत है।उनके पदचिन्हों पर चलना ही उनके लिए सच्चा श्रद्धांजलि होगा।इस मौके पर सीनियर अधिवक्ता महेन्द्र तिवारी ने कहा कि स्वर्गीय त्रिपाठी जूनियर अधिवक्ता को बताते थे कि एक रूलिंग सप्ताह में जरूर पढ़ें।इससे लॉ का कंसेप्ट व बोल्डनेस आएगा।वे बताते थे कि कोर्ट में किस तरह प्लेस करना है।वे हमेशा जूनियर को प्रोत्साहित करते थे।स्वर्गीय त्रिपाठी के नाती शशि भूषण दुबे ने कहा कि स्वर्गीय त्रिपाठी 14 अप्रैल 1950 में वकालत शुरू किए थे।वे 1962 से 1967 तक डालटनगंज भंडरिया विधानसभा का प्रतिनिधित्व किया।37 बर्षो तक अधिवक्ता के रूप में कार्य किये।उन्होंने कहा कि श्री त्रिपाठी एक दिन में चार कोर्ट में पेश होकर बहस करते थे।गढ़वा ,पलामू लातेहार के अलावे रांची उच्च न्यायालय में भी बहस कर समय के बेहद पावन्द थे। 8 मार्च 1987 में उनका देहावसान हो गया।इस मौके पर 12 अधिवक्ता को पलामू के प्रधान जिला व सत्र न्यायाधीश श्री राम शर्मा के हाथों शॉल ओढ़ाकर व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।सम्मनित किये जाने वाले अधिवक्ता में अवधेश कुमार पांडेय, चंद्रभूषण मिश्रा, मदन तिवारी, अजय कुमार पांडेय, योगेंद्र प्रसाद सिंह, ज्वाला दुबे, जयशंकर प्रसाद, प्रदीप कुमार सिंह, रंजन कुमार सिंह ,जावेद अख्तर खान ,जसवंत कुमार तिवारी ,अरुण कुमार शामिल है। कार्यक्रम का संचालन अधिवक्ता दिवाकर दुबे ने किया उन्होंने स्वर्गीय त्रिपाठी के जीवनी पर विस्तार से प्रकाश डाला । कहा कि स्वर्गीय त्रिपाठी कर्तव्य के प्रति पूरे वफादार थे।उन्होंने हमेशा जूनियर को प्रोत्साहित करने का काम किया।वे अधिवक्ता के रूप में अमिट छाप छोड़ गए।इस मौके पर रवि भूषण दुबे, बालकृष्ण त्रिपाठी,जनार्दन प्रसाद सिंह, मंधारी दुबे ,जय किशोर पाठक ,देव कुमार शुक्ला, शिवकुमार तिवारी,, एलएडीसी के चीफ अमिताभ चन्द सिंह डिप्टी चीफ संतोष कुमार पांडेय, विक्रम त्रिपाठी , हरिनंदन सिंह, संजय पांडेय, सहदेव प्रसाद सिंह, शिवाजी सिंह ,अमित तिवारी, अभिषेक चौबे, राजेश दुबे ,मनोज राजन ,मधुलता रानी,सिकंदर दुबे ,सुप्रिया रंजन, रामप्रवेश रजक समेत दर्जनों अधिवक्ता उपस्थित थे।

