अंधविश्वास समाज को कर रहा है खोखला, एल ए डी सी डिप्टी चीफ

डायन बिसाही जैसे सामाजिक कुरीति मिटाने के लिए लोग आए आगे

मेदिनीनगर (पलामू)

अंधविश्वास समाज को खोखला कर रहा है। डायन बिसाही कोई चीज नहीं है ।यह अंधविश्वास है । अंधविश्वास को मिटाने के लिए समाज के लोगों को आगे आने की जरूरत है ।यह समाज के लिए नासूर बन गया हैं।उक्त बातें लीगल एड डिफेंस काउंसिल के डिप्टी चीफ संतोष कुमार पांडेय ने कहीं ।उन्होंने कहा कि डायन बिसाही के मामले में पुरुष से ज्यादा महिलाएं शिकार होती है ।उन्होंने कहा कि किसी भी महिला को डायन घोषित करने के पीछे अधिकांशत मामले में साजिश होता है। पुराने रंजीश से झगड़ा के कारण उसके गांव के या उसके जानने वाले ही डायन होने का अफवाह फैलाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को दंडित करने के लिए डायन प्रथा तिषेध अधिनियम 2001 का प्रावधान किया गया हैं।इसके तहत कोई भी ब्यक्ति किसी की पहचान डायन के रूप में करता है तो उसे तीन महीने की जेल सहित जुर्माना देना होगा।डायन कहकर महिला को प्रताड़ित करता हैं तो छह माह तक जेल व जुर्माना देना पड़ेगा।झाड़ फुक या टोटका से उपचार करने वाले ओझा तांत्रिक भी कानूनी करवाई से नही बच सकते।उन्हें भी जेल की हवा खानी पड़ेगी।

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