मेदिनीनगर (पलामू)
शहर के रेड़मा स्थित देवम इंस्टीट्यूट में मंगलवार को विवेकानंद जयंती समारोह में बतौर विशिष्ट अतिथि शामिल हुए। देवम इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर प्रवीण दुबे जी ने अंगवस्त्र पुष्प देकर स्वागत किए। स्वामी जी के तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किए। नीट जेइइ के छात्र छात्राओं को संबोधित करते स्वामी जी के विचारों को रखा और हमने कहा आप सब में हमें विवेकानंद के प्रति छाया दिखाई दे रहा है। आप डॉक्टर इंजीनियर बनिए किंतु आपके जेहन में राष्ट्र प्रथम व सर्वोपरि रहना चाहिए। मानवता की सेवा और इंसानियत जिंदा रहे इसका ख्याल हमेशा रखना है। आप जब शिकागो धर्म सम्मेलन के भाषण सुनेगे एक एक शब्द के व्याख्या करेंगे तो भारत की आत्मा आपके दिलों में नजर आएगा। आप उनके विस्तृत विचारों को पढ़ेंगे तो पाएंगे कि वे सभी सभी धर्मों को सम्मान करने में विश्वास रखते थे। आज का जो दौर चल रहा है अपने धर्म को सर्वोच्च बताने में श्रेष्ठता हासिल करना जहां असहमति की कोई गुंजाइश नहीं है। वे मनुष्यता को प्रधान मानते थे और अंधविश्वास आडंबर ढोंग से दूर रहने को बोलते थे। आधुनिकता के दिखावे में मूल भोजन खान पान में जो गिरावट आया है उसके शख्त विरोधी थे और स्वास्थ्य को बनाए रखने पर जोर देते थे। खेल योगा एवं शरीर को स्वस्थ सुंदर बनाने पर उनका बल था। दुनिया के विश्व प्रसिद्ध फिलॉस्फी को पढ़े और किताब खूब पढ़ने पर जोर था हर युवा हर विषय को पढ़े। आप लोग भी तुलनात्मक साहित्य इतिहास और दर्शन पढ़े तभी विवेकानंद को समझ पाएंगे और यही उनकी सच्ची श्रद्धांजलि होगी। प्रवीण सर जैसे मेधा कोटा से आकाश एलेन छोड़ कर पलामू की धरती को उर्वरा बनाने और आप सब जैसे खिलते हुए गुलाब न जाने कितने मेधा भविष्य के अनगढ़ पत्थर लेकर बैठे हैं जिसको प्रवीण सर तराशेगे और दुनिया के पटल पर स्वामी विवेकानंद बना कर स्थापित करेंगे। आप सभी एकाग्रता के साथ सुनने समझने पढ़ने और सवाल पूछने तर्क करने के लिए तैयार रहें। भारत के सर्वोच्च मेधा को याद करने आदरणीय डॉक्टर राजीव नयन,आशीष भारद्वाज,शिक्षक मनोज जी, ओंकार तिवारी जी और ओजस्वी वक्ता वामपंथी विचारक और नेक इंसान शैलेन्द्र कुमार जी की गरिमाई उपस्थिति रही।

