मेदिनीनगर (पलामू)
भारत सरकार के संस्कृत स्तोत्र एवं प्रशिक्षण केंद्र दमोह मध्य प्रदेश द्वारा आयोजित कार्यशाला जिसका विषय , प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में विद्यालयों की भूमिका,, इसका कार्यशाला में देश के विभिन्न 10 राज्यों से 65 शिक्षक भाग लिए. इस 10 दिवसीय कार्यशाला में झारखंड की ओर से 9 शिक्षक भाग लिए. जिसमें पलामू से 6 शिक्षक अजय कुमार ,दीपक कुमार सिंह, जितेंद्र कुमार मेहता ,चंद्रकांता कुमारी ,सोनी कुमारी, अनपुणता कुमारी , लातेहार से उदय कुमार हजारीबाग से महेश रविदास ,पश्चिमी सिंहभूम से रामप्रताप पांडे उपस्थित हुए. इस कार्यालय में 10 दिनों में हर एक प्रकार की गतिविधि कराया गया. जिसमें कार्यशाला को विभिन्न सत्र में बांटा गया जैसे योग ,विभिन्न विद्वानों का व्याख्यान ,ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण ,पुरातात्विक केंद्र का अवलोकन, रिपोर्ट तैयार करना ,योजना बनाना, स्थानीय नृत्य,संगीत, संस्कृति का प्रदर्शन करना कार्य थे. इन सारी क्षेत्रीय विविधताओं को दिखाते हुए राष्ट्र को कैसे मजबूत किया जाए इस कार्य को करना था. जिससे एक भारत श्रेष्ठ भारत का निर्माण हो सके। झारखंड की ओर से शिक्षक टीम को नेतृत्व कर रहे अजय कुमार ने सभी शिक्षकों से समन्वय बनाकर झारखंड की प्राकृतिक और संस्कृत संपदा जिसमें खनिज,नृत्य ,गीत पर्व, उद्योग आदिवासी संस्कृति,। राज्य में चल रहे शिक्षा से संबंधित योजनाएं तथा विद्यार्थियों को दिए जा रहे हैं लाभ। जैसे cm एक्सीलेंस स्कूल, रेल प्रोजेक्ट छात्रवृत्ति,बैग,पुस्तक,से अवगत कराया तथा संबंधित मॉडल को प्रदर्शित किया गया । जेसीआरटी द्वारा शिक्षा की गुणवत्ता को उत्तरोत्तर वृद्धि तथा नई शिक्षा नीति को व्यावहारिक रूप देने के लिए अनेको कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं तथा राज्य की शैक्षणिक विकास में जेसीआरटी की भूमिका को भी व्याख्यान के माध्यम से प्रदर्शित किया झारखंड की संस्कृत ऐतिहासिक और प्राकृतिक विरासतों को प्रोजेक्ट के रूप में दिखाया गया तथा किस प्रकार से इन विरासतों को संरक्षण किया जाए तथा भविष्य में आने वाले पीढ़ियों को इसी का संसाधनों इसी रूप में दें।
झारखंड शिक्षक टीम को नेतृत्व कर रहे हैं अजय कुमार ने संस्कृति मंत्रालय दमोह तथा जेसीआरटी को इस कार्य के लिए धन्यवाद ज्ञापन करती है कि भविष्य में ऐसे ऐसे कार्यशाला को आयोजित कराया जाए जिससे योजनाओं और विभिन्न संस्थाओं के कार्यों को प्रासंगिक बनाए जा सके तथा इसे छात्रों तक पहुंचा जा सके.

