तमिलनाडु की वो महिला कांस्टेबल जिसकी गवाही से 9 पुलिसकर्मी को हो गई फांसी, पढ़िये निडर रेवती की कहानी

( नई दिल्ली )

हमारे समाज में महिलाएं घर संभालने से लेकर देश संभालने तक की हिम्मत रखती है, लेकिन इन्हीं महिलाओं को तरह-तरह की बातें सुनने को मिलती है, कि महिला डरपोक होती है, कमजोर होती है,लेकिन समय आने पर हर महिलाओं ने यह सबित करके दिखाया है कि महिला कभी भी डरपोक और कमजोर नहीं होती है. अगर एक महिला ठान लें तो वह किसी का भी तख्ता पलट कर सकती है.एक ऐसी ही प्रेरणादायक महिला की के बारे हम आज बात करने वाले है जिसने यह सबित कर दिया है कि महिलाएं जब चाह ले तो कुछ भी कर सकती है.

पढ़े देशभर में क्यों हो रही है इस महिला की चर्चा

इन दिनों तमिलनाडु की एक महिला कॉन्स्टेबल की चर्चा पूरे देश में काफी जोरों पर है. दरअसल इस महिला कॉन्स्टेबल ने एक ऐसी बहादुरी का काम किया है जिसने 9 पुलिसकर्मियों को फांसी तक पहुंचा दिया.दरअसल साल 2020 में तमिलनाडु के थूथुकुडी जिले के साथनकुलम में घटित चर्चित कस्टोडियल डेथ मामले में बीते दिनों बड़ा फैसला आया.जिसमे कई पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा सुनाई गई.आपको बता दें कि ये पूरा मामला 2020 का जब लॉकडाउन के दौरान दुकान खोलने के आरोप में बाप बेटे को गिरफ़्तार किया गया. वहीं दोनों को रात भर लॉकअप में रखकर जमकर बेरहमी से पीटा गया.जिससे लॉकअप में ही उनकी मौत हो गई थी.अब आपको लगेगा कि इसमे महिला कांस्टेबल की कौन सी बहादुरी शामिल है तो चलिए आपको सिलसिलेवार तरीके से उसकी बहादुरों की कहानी बताते है.

9 पुलिसकर्मियों को फंदे तक पहुंचा दिया

दरअसल इस मामले में आरोपी 9 पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा सुनाई गई लेकिन उनको फांसी की सजा सिर्फ एक महिला कांस्टेबल के बदौलत ही हो पाई.इस महिला कांस्टेबल का नाम रेवती है, उसने जो हिम्मत दिखाई उसी का परिणाम है कि आरोपियों को सजा मिल पाई आइए जानते है रेवती कौन है और वह कैसे इस मामले की मुख्य गवाह बन गई जिसकी वजह अरोपियों को सजा तक तक पहुंचाया दिया.

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