संत मरियम विद्यालय बच्चों को सिर्फ पुस्तकिय तालीम नहीं बल्कि तिजारती तहजीब सिखाती है , अविनाश देव

मेदिनीनगर (पलामू)

राष्ट्र निर्माण के पहला पत्थर बच्चे हैं।यदि आप बच्चों को शारीरिक मानसिक मजबूती प्रदान कर रहे हैं तो निश्चित ही आप राष्ट्र को मजबूत बना रहे हैं। समाज विज्ञानी,स्वास्थ्य विज्ञानी और नागरिक हितों के रक्षार्थ मानवाधिकार संस्थाओं ने बुनियादी जरूरतों रोटी कपड़ा मकान शिक्षा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए संयुक्त राष्ट्र के पहल, भारत सरकार के व्यापक विजन के मद्दे नजर भोजन के अधिकार कानून को बनाना पड़ा। उपस्थिति,कुपोषण,लैंगिक भेदभाव,सामाजिक असमानता को खत्म करने के उद्देश्य से 2001 में सर्वोच्च न्यायालय का आदेश आया सभी स्कूलों में पक्का हुआ गर्म भोजन देना अनिवार्य होगा।2021 में प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना लागू किया गया। इन तमाम लोक कल्याणकारी योजनाओं से प्रेरित अपने अभिभावक से कोसों दूर रह रहे आवासीय बच्चों को जीवन के जटिलताओं से अवगत कराने के लिए संत मरियम स्कूल के बच्चों को सप्ताह में एक दिन एक वक्त का भोजन बनाने का कार्य तालिका में शामिल किए। सुबह में बेटियां शाम को लड़कों ने एक जून के खाना अपने से पकाएंगे और एक साथ भोजन खायेंगे।
बेटियों ने आज भोजन पकाई मैं भी एक साथ बैठ कर भोजन प्राप्त किए। बच्चों को बताया जब आप संत मरियम विद्यालय से निकलेंगे घर छोड़ संघर्ष के मैदान में जाएंगे तो आपको खुद से खुद को जंग लड़ना पड़ेगा तभी आप सफलता के सीढ़ी चढ़ पाएंगे नहीं तो जिंदगी के सफर में पीछे छूट जाएंगे। आप जो कुछ भी कर रहे हैं दो जून के रोटी के लिए कर रहे हैं। यह कार्य पहले गुरुकुलीय व्यवस्था में किताब के अलावे अनिवार्य था,जहां भिक्षाटन,कृषि,पशुपालन,बागवानी दैनंदिन के सारी उपभोक्ता वस्तुओं के लिए उद्यम करना पड़ता था ताकि आगे के दिनों में अतिरिक्त बोझ न लगे। इसलिए आप संत मरियम विद्यालय में कुछ दिन के मेहमान हैं हर क्षेत्र में इतना दक्षता हासिल कर लिजिये कौशल से इतना परिपूर्ण हो जाइए कि मुशीबत आपको झुक कर सलाम करे। ऐसे आपका पकाया भोजन स्वादयुक्त स्वास्थ्यवर्धक है। हम आपके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं आप बुलंदी को स्पर्श करें। बहुत बहुत शुक्रिया!

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