आदिवासी संस्कृति व परंपरा ही सभ्यता के आधारशिला है , अविनाश देव

मेदिनीनगर (पलामू)

विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर संत मरियम स्कूल के छात्र छात्राओं ने आदिवासी पारंपरिक भेष भूषा में शहर के सड़कों पर गीत नृत्य करते नगर भ्रमण किए। कार्यक्रम की शुरुआत पलामू उपायुक्त आवास से की गई,जहां उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत जी ने झांकी एवं आदिवासी नृत्य को देखा और सराहा। मौके पर उपायुक्त महोदय को पारंपरिक अंगवस्त्र देकर स्वागत किए। मेदिनीनगर के हर्ट छः मोहान चौक, पंच मोहान,भगत सिंह चौक,साहित्य समाज चौक होते पुलिस लाईन में झांकी को समाप्त किया गया।
बच्चों को संबोधित करते हमने कहा पृथ्वी का अस्तित्व आदिवासी संस्कृति और परंपरा से है। जल जंगल जमीन खान खनिज और पर्यावरण उनके सांस से संरक्षित है। विकास के नाम पर जिस तरह प्रकृति के साथ छेड़ छाड़ हो रहा है मानव जीवन का अस्तित्व ख़तरे में है। भारत के जारवा जनजाति की तरह विश्व के बहुत सी जनजातियां खत्म होने के कगार पर है। उनकी परंपरा उनकी संस्कृति उनकी भाषा उनकी बोली को बचाने के लिए यूनाइटेड नेशन एक दिन आदिवासियों के नाम का दिवस घोषित किया। तब से दुनिया भर में विश्व आदिवासी दिवस मनाया जाता है। आज झारखंड पूरे शबाब पर है मोरहाबादी के मैदान से लेकर नेतरहाट के पहाड़ी तक,हर गांव कस्बे में हमारे आदिवासी भाई बहने भगवान बिरसा मुंडा के उलगुलान सिद्धू कानू के हूल नीलांबर पीताम्बर के परंपरा और दिशोम गुरुजी के सपनों को साकार करने के लिए आदिवासीयत बचाने में लगे हैं। विश्व आदिवासी दिवस को बड़े उत्साह से माना रहे है। पलामू जिला प्रशासन को तहे दिल से शुक्रिया की आपने संत मरियम विद्यालय के बच्चों को संस्कृति समझने का मौका दिया। विश्व के तमाम आदिवासी भाई बहनों को हार्दिक शुभकामनाएं,जोहार!

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