जब भक्ति सड़कों पर उतरी… रेहला में गूंज उठा “जय श्री राम” का स्वर

विश्रामपुर (पलामू)

सुबह की हल्की धूप जैसे ही रेहला की धरती पर उतरी, वातावरण में कुछ अलग सा अहसास था एक उत्सुकता, एक ऊर्जा, और सबसे बढ़कर… आस्था की गहराई। मौका था रामनवमी पूजा महोत्सव का, और केंद्र बना था सिद्धपीठ बाबा योगीबीर मंदिर, जहां से शुरू होने वाली थी एक ऐसी यात्रा, जो सिर्फ रास्तों पर नहीं, लोगों के दिलों में भी उतरने वाली थी।

मंदिर प्रांगण में सजी धजी महिलाएं सिर पर कलश लिए खड़ी थीं। उनके चेहरे पर श्रद्धा की चमक और आंखों में भक्ति की गहराई साफ झलक रही थी। जैसे ही वैदिक मंत्रों की गूंज उठी, माहौल पूरी तरह आध्यात्मिक हो गया। उसी क्षण, भाजपा प्रदेश कार्य समिति सदस्य डॉ. ईश्वर सागर चंद्रवंशी उर्फ मुन्ना चंद्रवंशी, ग्रासिम इंडस्ट्रीज के एचआर प्रमुख पद्माकर लाल दास, कांग्रेसी नेता रामचंद्र दीक्षित समेत अन्य गणमान्य लोगों ने भगवा झंडा लहराकर इस भव्य कलश शोभायात्रा को रवाना किया।
और फिर… सड़कों पर आस्था उतर आई।

ढोल नगाड़ों की थाप, शंखनाद की गूंज और जय श्री राम के नारों से पूरा रेहला थर्रा उठा। हर गली, हर चौक जैसे इस भक्ति के सैलाब में डूब गया। शोभायात्रा रेलवे स्टेशन, थाना चौक होते हुए कोयल नदी तट की ओर बढ़ी। वहां पहुंचते ही श्रद्धालुओं ने वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच कलशों में पवित्र जल भरा वो पल मानो धरती और आस्था के मिलन का साक्षी बन गया।
इसके बाद जब यह यात्रा नगर भ्रमण पर निकली, तो हर मोड़ पर लोगों ने फूल बरसाकर स्वागत किया। बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं हर कोई इस दृश्य का हिस्सा बनना चाहता था। ऐसा लग रहा था मानो पूरा शहर एक ही धड़कन पर चल रहा हो भक्ति की धड़कन।
अंततः यह भव्य यात्रा वापस योगीबीर बाबा यज्ञशाला परिसर पहुंची, लेकिन अपने पीछे छोड़ गई एक अमिट छाप एक ऐसी याद, जिसमें आस्था, एकता और संस्कृति का अद्भुत संगम था।
उस दिन रेहला ने सिर्फ एक शोभायात्रा नहीं देखी… उसने भक्ति को जीया।

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