बरवाडीह (लातेहार)
बरवाडीह प्रखंड अंतर्गत पोखरी खुर्द के टोला छेछानी बालू घाट से सतबरवा को जोड़ने वाले निर्माणाधीन पुल में भारी तकनीकी अनियमितता बरते जाने का मामला सामने आया है। इससे आक्रोशित सैकड़ों ग्रामीणों ने निर्माण स्थल पर पहुँचकर निर्मण कार्य पर रोक लगा दी है और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जाँच की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि पुल निर्माण में संवेदक द्वारा मानक नियमों को ताक पर रखकर कार्य कराया जा रहा है, जिससे भविष्य में पुल की मजबूती और आम लोगों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है। ग्रामीणों ने बताया कि पुल के एक फुटिंग के कॉलम में एक तरफ 16 एमएम का सरिया लगाया गया है, जबकि दूसरी तरफ 25 एमएम का सरिया उपयोग किया गया है, जो तकनीकी दृष्टि से पूरी तरह नियमों के विरुद्ध है। इसके अलावा बॉटम सरिया सेटिंग में जगह-जगह जॉइंट (कटे हुए) सरिया का इस्तेमाल किया गया है, जो संरचनात्मक मजबूती को कमजोर करता है। वहीं टॉप सरिया में किसी भी प्रकार की मानक लैपिंग नहीं की गई है। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि ढलाई कार्य में 8 -1 अनुपात का घटिया मसाला इस्तेमाल किया गया, साथ ही कीचड़युक्त और गंदे पानी का प्रयोग किया गया, जो निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। निरीक्षण के दौरान यह भी पाया गया कि फुटिंग एरिया में पानी भरा हुआ है, बावजूद इसके ढलाई की तैयारी की जा रही थी, जबकि तकनीकी नियमों के अनुसार कंक्रीट डालने से पहले पानी निकालना अनिवार्य होता है। नीचे और साइड में कंक्रीट कवर ब्लॉक नहीं लगाए गए हैं, जिससे सरिया सीधे मिट्टी और पानी के संपर्क में है। इससे सरिया में जंग लगने और पुल के कमजोर होने की आशंका बनी हुई है। साथ ही साइड कवर और शटरिंग भी मानक के अनुरूप नहीं है। सरिया और मिट्टी के बीच न्यूनतम दूरी नहीं रखी गई है। कई स्थानों पर सरिया की बाइंडिंग ढीली पाई गई, जिससे ढलाई के दौरान सरिया के हिलने की संभावना बनी रहती है। कॉलम के खड़े सरिये भी पूरी तरह प्लम्ब (सीधे) नहीं हैं, जिससे आगे कॉलम निर्माण में डिज़ाइन गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है।
वही ग्रामीणों ने यह भी बताया कि पुल निर्माण के दौरान ब्लास्टिंग का सहारा लिया गया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि ब्लास्टिंग सामग्री कहां से लाई गई और इसके लिए किन-किन अधिकारियों से अनुमति ली गई। यह भी जांच का गंभीर विषय है। ग्रामीणों का कहना है कि नीचे पीसीसी (ब्लाइंडिंग कंक्रीट) नहीं की गई है और सीधे मिट्टी पर आरसीसी कार्य किया जा रहा है, जो तकनीकी रूप से गलत है। साथ ही सरिया का कवर अंतराल भी असमान है और सही स्पेसर या कुर्सी का उपयोग नहीं किया गया है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कर दोषी संवेदक और अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं की जाती तथा मानक के अनुरूप पुनः कार्य शुरू नहीं होता, तब तक वे निर्माण कार्य नहीं होने देंगे। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और जनता की सुरक्षा से जुड़े इस पुल निर्माण में पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित की जाती है।

