सावित्री बाई का संघर्ष ही स्त्री शिक्षा में लई नई क्रांति , अविनाश देव

मेदिनीनगर (पलामू)

सावित्री बाई निःशुल्क शिक्षण संस्थान डाली में सावित्री बाई फुले जयंती समारोह में अविनाश देव ने बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। संस्थान के सदस्यों ने तिलक लगा पुष्पवर्षा कर अभिनंदन किए। संस्थान के संस्थापक फूलमाला पहना कर स्वागत किए। माता सावित्री बाई के तस्वीर पर मोमबती जलाकर पुष्पांजलि अर्पित किया और केक काट कर जन्मदिन मनाए। अविनाश देव ने अपने संबोधन में कहा माता सावित्री बाई के संघर्ष ही महिलाओं के शिक्षा में क्रांति लाई है। माता सावित्री बाई अगर संघर्ष नहीं करती तो आज महिलाओं की स्थिति बदतर हालत में रहता। इस संस्थान के संस्थापक रणजीत रंजन जी को हम धन्यवाद करना चाहेंगे कि जब शिक्षा महंगी हो रही है फीस में इज़ाफ़ा किया जा रहा हो पूंजी की दुनिया सिर चढ़ कर बोल रहा हो तब निःशुल्क शिक्षा देना साधारण बात नहीं है। संस्थान के सभी सदस्यों को हम कहना चाहेंगे आप मजबूती से गांव के बच्चों को शिक्षित करने में लगे रहें इसी में से कोई आंबेडकर,बिरसा, भगत सिंह,असफाकउल्लाह बिस्मिल निकलेगा और इलाके के नाम को रौशन कर देगा। आप अपने बच्चों को दस कदम आगे करे हम नब्बे कदम ले जाएंगे। अविनाश देव ने घोषणा किया कि सावित्री बाई फुले निःशुल्क शिक्षण संस्थान के बच्चों को कलम कागज जितना खर्च होगा हम संत मरियम विद्यालय के सौजन्य से निःशुल्क आपूर्ति करेंगे। समिति के लोग अगर लिख कर दें कि अमुक लड़की निहायत निर्धन गरीब है और पढ़ने में तेज है तो हम गोद लेंगे और पढ़ाएंगे। सावित्री बाई की सहयोगी शेख फातिमा रही थी और डाली के इलाके में मुस्लिम भाइयों की बहुलता है अगर आपसी समन्वय बना कर यह विद्यालय चलाया जाए तो माता सावित्री फातिमा शेख द्वारा खोला गया भारत के पहला विद्यालय का दूसरा रूप होगा। जन सहयोग से भवन और संसाधन जुटा कर इसे प्रगति के पथ पर ले जाना ही माता सावित्री बाई के सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इस संस्थान के उत्थान में हम हमेशा समिति के साथ हैं। क्विज कंपटीशन के प्रतिभागी बच्चों को मोमेंटो व प्रशस्ति पत्र अविनाश देव के हाथों दिया गया। माता सावित्री बाई जयंती समारोह आयोजि करने में रूपेश कुमार रवि,जितेंद्र जी,रविरंजन जी,डब्लूजी अरुण जी,बसंत जी, लल्लू सरजी,संजीव रंजन जी, एजाज आलम जी,विजय सिंह,राकेश रंजन आफताब आलम,सत्येंद्र कुमार सिंह,श्याम नारायण जी,पिंटू महती भूमिका निभाया।जय भीम! जोहार।

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