नवरात्र के मौके पर ब्रहमोरिया गांव में हो रहा कथावचन
विश्रामपुर (पलामू)
रामायण से लोगों को जीवन जीने की सीख मिलती है। इस धार्मिक ग्रंथ में भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा गया है वहीं माता सीता की पवित्रता का जिक्र किया गया है। भगवान राम जी को जगत के पालनहार भगवान विष्णु के 10 अवतारों में 7वां अवतार माना जाता है। भगवान राम जी ने ऐसे अनेक काम किए हैं, जिनके कार्यों की सराहना आज भी की जाती है। जगत गुरु सर्वेश्वराचार्य जी महाराज के द्वारा ब्रहमोरिया गांव में संपन्न हो रहे नवरात्र महायज्ञ के सप्तमी तिथि को रामजन्म पर कथावाचन करते कहा गया।
आचार्य जी ने कहा कि भगवान राम ने अपना पूरा जीवन एक मर्यादा में रहकर व्यतीत किया है। भगवान राम के आचरणों से यह सीख मिलती है कि परिवार में माता-पिता व भाई-बहन के साथ किस प्रकार का व्यवहार करना चाहिए। कई लोगों को इस बात की जानकारी नही है कि आखिर क्यों भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा गया है? भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम क्यों कहलाए? आचार्य ने कहा कि तुलसीदास जी ने रामचरित मानस में श्री राम को एक आदर्श पुरुष के रूप में चित्रित किया है, जिनमें सभी प्रकार के गुणों का समावेश है। वे करुणा, दया, क्षमा, सत्य, न्याय, सदाचार, साहस, धैर्य, व नेतृत्व जैसे गुणों के धनी हैं। वे एक आदर्श पुत्र, भाई, पति, राजा व मित्र हैं। भगवान ने जहां केवट को गले लगाएं, वहीं शबरी के जुठे बैर भी खाए। मौके पर पूजा समिति के अध्यक्ष डबल पांडेय, सुनील दुबे, विनय पांडेय, शशि पांडेय, हरिशंकर दुबे, पिंटू पांडेय, प्रवीण बाबू पांडेय, अंकित पांडेय, राजू बैठा, सहित सैकड़ों लोग उपस्थित थे।

