विजयादशमी पर अविनाश देव ने पूजा पंडालों में माँ दुर्गा का लिया आशीर्वद

बोले— दुर्गा पूजा के संकल्प को सालभर निभाएँ, बेटियों की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक सुविधाओं के प्रति सजग रहें युवा

मेदिनीनगर (पलामू)

विजयादशमी के पावन अवसर पर संत मरियम आवासीय विद्यालय के अध्यक्ष, झारखंड माटी कला बोर्ड के सदस्य एवं झारखंड मुक्ति मोर्चा के वरिष्ठ नेता और सामाजिक कार्यकर्ता अविनाश देव ने मेदिनीनगर नगर के विभिन्न दुर्गा पूजा पंडालों में पहुँचकर माँ भवानी के दर्शन किए और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने पूजा समितियों के पदाधिकारियों, सदस्यों और अपने साथियों से मुलाकात कर विजयादशमी की शुभकामनाएँ दीं तथा भव्य आयोजन के लिए उनकी सराहना की।

अविनाश देव ने कहा कि नवरात्र के सप्तमी, अष्टमी और नवमी के अवसर पर अपरिहार्य पारिवारिक एवं सामाजिक दायित्वों के कारण वे नगर के विभिन्न पूजा पंडालों में उपस्थित नहीं हो सके। अपनी सासू माँ के ब्रह्मभोज, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की माता दिवंगत रूपी सोरेन के संस्कार भोज तथा अपने मित्रों के यहाँ श्राद्धकर्म में शामिल होने के कारण उनकी व्यस्तता रही। उन्होंने इसके लिए नगर की सभी दुर्गा पूजा समितियों के अध्यक्षों, सचिवों, संरक्षकों एवं सदस्यों से विनम्रतापूर्वक क्षमा माँगी।

उन्होंने कहा कि दुर्गा पूजा समितियों के साथ उनका आत्मीय संबंध रहा है। विद्यालय के अध्यक्ष, सामाजिक कार्यकर्ता और केंद्रीय दुर्गा पूजा समिति के संरक्षक के रूप में पूजा समितियों के बीच उपस्थित रहना उनकी नैतिक जिम्मेदारी है। परिस्थितियों के कारण पहले नहीं पहुँच पाने का उन्हें अफसोस रहा। विजयादशमी के दिन समय मिलते ही उन्होंने विभिन्न पूजा पंडालों में पहुँचकर माँ दुर्गा के चरणों में शीश नवाया और अपने साथियों से मिलकर आयोजन की सफलता के लिए बधाई दी।

इस दौरान उन्होंने हाउसिंग कॉलोनी, बैरिया,साहित्य समाज चौक, जय भवानी संघ बाजार सहित विभिन्न पूजा पंडालों तथा बंगाली दुर्गा पूजा समिति के पंडाल में पहुँचकर माँ भवानी के दर्शन किए। उन्होंने पूजा समितियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि धार्मिक आयोजन हमारी सनातन संस्कृति, सामाजिक एकता और आपसी सद्भाव को मजबूत करते हैं।

नारी शक्ति की आराधना के साथ बेटियों की सुरक्षा का संकल्प भी जरूरी

अविनाश देव ने कहा कि नौ दिनों तक माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना करने के बाद विजयादशमी हमें अधर्म पर धर्म, असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश देती है। लेकिन पूजा की वास्तविक सार्थकता तभी है, जब हम माँ दुर्गा के शक्ति स्वरूप को अपने आचरण और सामाजिक व्यवहार में भी उतारें।

उन्होंने कहा कि एक ओर हम माँ दुर्गा को शक्ति का स्वरूप मानकर उनकी पूजा करते हैं, वहीं दूसरी ओर समाज में बेटियों को गर्भ में मारने, दहेज के लिए प्रताड़ित करने और विवाह के बाद हिंसा का शिकार बनाने जैसी घटनाएँ सामने आती हैं। यह हमारे सामाजिक विवेक के लिए गंभीर प्रश्न है।

उन्होंने युवाओं और समाज के सभी वर्गों से आह्वान किया कि वे विजयादशमी पर संकल्प लें कि अपने घर, गाँव, मोहल्ले और शहर की बेटियों की सुरक्षा एवं सम्मान के लिए सदैव खड़े रहेंगे।

उन्होंने कहा, “जहाँ नारी का सम्मान होता है, वहीं देवताओं का वास होता है। माँ दुर्गा की आराधना तभी सार्थक होगी, जब हमारी बेटियाँ सुरक्षित होंगी, महिलाओं को सम्मान मिलेगा और किसी भी बेटी के साथ अन्याय होने पर समाज उसके पक्ष में खड़ा होगा।”

पूजा का संकल्प केवल नौ दिनों के लिए नहीं, पूरे वर्ष के लिए हो

अविनाश देव ने युवाओं से पर्यावरण संरक्षण, यातायात व्यवस्था और नागरिक सुविधाओं के प्रति भी जागरूक रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्वच्छता, पर्यावरण की रक्षा, यातायात नियमों का पालन और शहर की व्यवस्था बनाए रखना केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।

उन्होंने कहा कि हमारा शहर हम सभी का है। इसकी सुंदरता, स्वच्छता, सुरक्षा और बेहतर व्यवस्था के लिए प्रत्येक नागरिक को अपनी भूमिका निभानी चाहिए। धार्मिक आयोजनों के दौरान दिखाई देने वाली एकजुटता और अनुशासन को पूरे वर्ष अपने व्यवहार में बनाए रखने की आवश्यकता है।

उन्होंने अंत में कहा कि विजयादशमी केवल उत्सव मनाने का पर्व नहीं, बल्कि अपने भीतर की बुराइयों को समाप्त करने और समाज को बेहतर बनाने का अवसर है। माँ दुर्गा से यही प्रार्थना है कि समाज में प्रेम, सद्भाव, न्याय और मानवता की भावना मजबूत हो तथा हर बेटी सुरक्षित, शिक्षित और सम्मानित जीवन जी सके।

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