बाल संरक्षण और महिला सशक्तिकरण को लेकर समीक्षा बैठक, उपायुक्त ने जमीनी स्तर पर असरदार कार्रवाई का दिया निर्देश

मेदिनीनगर (पलामू)

समाहरणालय स्थित सभागार कक्ष में उपायुक्त की अध्यक्षता में बाल संरक्षण एवं महिला सशक्तिकरण से संबंधित जिला स्तरीय समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक में उपायुक्त ने सभी विभागों और सामाजिक संस्थाओं को धरातल (grassroots) पर उतरकर मजबूती से कार्य करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि कागजी प्रगति के बजाय जमीनी स्तर पर दिखने वाली कार्रवाई और परिणाम सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता है।

​बैठक के दौरान जिला समाज कल्याण पदाधिकारी श्रीमती नीता चौहान ने विभाग की प्रगति रिपोर्ट साझा करते हुए कहा, “जिले में बाल विवाह की रोकथाम, कुपोषण उन्मूलन और महिलाओं के विरुद्ध हिंसा को रोकने के लिए विभाग पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रहा है। आंगनबाड़ी केंद्रों और पंचायत स्तर पर निरंतर जागरूकता अभियान चलाकर हर एक केस की ट्रैकिंग की जा रही है। हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि स्पॉन्सरशिप और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे पीड़ित एवं जरूरतमंद बच्चों तक पहुंचे। सभी सहयोगी विभागों और एनजीओ के समन्वय से पलामू को बाल-विवाह मुक्त और सुरक्षित जिला बनाने के लिए कठोर कदम उठाए जा रहे हैं।”
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​प्रशिक्षु IAS श्री रितिक मेहता
​”बाल अधिकार संरक्षण और महिला सुरक्षा को लागू करने में अंतर-विभागीय समन्वय (inter-departmental coordination) सबसे अहम भूमिका निभाता है। क्षेत्र भ्रमण के दौरान जमीनी समस्याओं को चिन्हित कर योजनाओं का पारदर्शी एवं त्वरित क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा।”

​”पंचायत स्तर पर विवाह और प्रवास पंजी का उचित संधारण अत्यंत आवश्यक है। पंचायतों को सक्रिय कर स्थानीय जनप्रतिनिधियों के माध्यम से बाल श्रम और नशा मुक्ति पर सीधा संवाद स्थापित किया जा रहा है।”

​”POCSO, बाल विवाह और महिला हिंसा से जुड़े मामलों में पुलिस तुरंत और कठोर कानूनी कार्रवाई कर रही है। बच्चों एवं महिलाओं की सुरक्षा हेतु संवेदनशील दृष्टिकोण के साथ थानों में त्वरित सुनवाई सुनिश्चित की जा रही है।”

​जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी (DCPU) एवं अध्यक्ष, CWC:
​”CNCP और POCSO से प्रभावित बच्चों के काउंसलिंग, फोस्टर केयर एवं स्पॉन्सरशिप की प्रक्रिया को तेज कर दिया गया है। संकटग्रस्त बच्चों के पुनर्वास और उन्हें सुरक्षित वातावरण प्रदान करने के लिए हमारी टीम लगातार प्रयासरत है।”

​”बाल श्रम उन्मूलन हेतु व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और होटलों में सघन जांच अभियान चलाया जा रहा है। रेस्क्यू किए गए बाल मजदूरों के पुनर्वास और उन्हें शिक्षा से जोड़ने का कार्य प्राथमिकता पर किया जा रहा है।”

​”विद्यालय छोड़ चुके बच्चों को चिह्नित कर उनका पुनः नामांकन कराने की प्रक्रिया जारी है। स्कूलों में नशा मुक्ति, POCSO और बाल विवाह के प्रति छात्रों को जागरूक करने हेतु विशेष सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।”

​”किशोर-किशोरी स्वास्थ्य, एनीमिया नियंत्रण और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर स्वास्थ्य केंद्रों में सुविधाएं बढ़ाई गई हैं। किशोरावस्था में गर्भधारण से होने वाले जोखिमों और नशा मुक्ति को लेकर लगातार परामर्श दिया जा रहा है।”
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​”पीड़ित बच्चों और महिलाओं को निःशुल्क विधिक सहायता (Free Legal Aid) त्वरित रूप से मुहैया कराई जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में लीगल अवेयरनेस कैंप के माध्यम से नागरिकों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।”

​”स्वयं सहायता समूहों (SHG) की दीदियों को बाल विवाह रोकने और मासिक धर्म स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जा रहा है। जरूरतमंद परिवारों को आजीविका से जोड़कर बाल श्रम की समस्या को जड़ से मिटाने का प्रयास जारी है।”

​”समाज में बच्चों के स्कूल छोड़ने (dropouts) और बढ़ती नशाखोरी की समस्या एक गंभीर चिंता का विषय है। युवाओं और बच्चों को नशे के गर्त से निकालने के लिए व्यापक नशामुक्ति अभियान और काउंसलिंग की सख्त जरूरत है।”

​”बाल विवाह को रोकने और बाल मजदूरों के रेस्क्यू (बचाव) के लिए जमीनी स्तर पर त्वरित और सख्त कदम उठाने होंगे। रेस्क्यू किए गए बच्चों को तुरंत शिक्षा और पुनर्वास प्रणाली से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है।”

​बैठक में उपरोक्त अधिकारियों के अलावा ‘नयी संस्कृति’ से चंदा झा, ‘अग्रगति’ से सुभ्रा पांडे तथा ‘रानी डॉली संस्थान’ से समरेंद्र मेहता एवं अन्य स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधि भी मुख्य रूप से उपस्थित रहे और अपने विचार साझा किए।

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