मेदिनीनगर (पलामू)
झारखंड प्रगतिशील शिक्षक संघ (JPSS) सह झारोटेफ, पलामू के जिला अध्यक्ष मनोज मेहता ने तत्कालीन जिला शिक्षा अधीक्षक, पलामू श्री संदीप कुमार द्वारा 31 सहायक आचार्यों के कथित बैक-डेट में किए गए स्थानांतरण पर गंभीर आपत्ति व्यक्त करते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है।
मनोज मेहता ने कहा कि 31 सहायक आचार्यों के स्थानांतरण संबंधी अधिसूचना 02 जुलाई को जारी की गई, जबकि तत्कालीन जिला शिक्षा अधीक्षक के स्थानांतरण की अधिसूचना 29 जून को ही प्रकाशित हो चुकी थी। साथ ही, 03 जुलाई को ही नवपदस्थापित जिला शिक्षा अधीक्षक ने अपने पद का विधिवत कार्यभार ग्रहण कर लिया था। ऐसी स्थिति में यह गंभीर प्रश्न उठता है कि स्थानांतरण की अधिसूचना जारी होने के बाद तत्कालीन जिला शिक्षा अधीक्षक के नाम से स्थानांतरण आदेश किस वैधानिक एवं प्रशासनिक आधार पर जारी किया गया।
उन्होंने कहा कि तत्कालीन उपायुक्त, पलामू श्रीमती समीरा S महोदय के द्वारा नवंबर माह में ही सहायक आचार्यों की पदस्थापना में आवश्यक संशोधन का निर्देश दिया गया था। यदि निर्देश उसी समय प्राप्त हो गया था, तो लगभग आठ माह तक इस पर कार्रवाई लंबित क्यों रखी गई?
उन्होंने आगे कहा कि 18 मार्च को आयोजित स्थापना समिति की बैठक में 227 सहायक आचार्यों के स्थानांतरण का प्रस्ताव पारित किया गया था। ऐसे में केवल 31 सहायक आचार्यों का ही स्थानांतरण किन मानकों एवं किन परिस्थितियों में किया गया, यह सार्वजनिक किया जाना चाहिए। साथ ही शेष प्रस्तावित मामलों पर क्या निर्णय लिया गया, इसकी भी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
यदि स्थानांतरण में विलंब का कारण जनगणना कार्य बताया जा रहा है, तो यह तर्क भी कई प्रश्न खड़े करता है। स्थापना समिति की बैठक 18 मार्च को संपन्न हो चुकी थी, जबकि जनगणना कार्य 15 मई से प्रारंभ हुआ। ऐसे में मार्च से मई तक तथा उसके बाद भी स्थानांतरण आदेश जारी करने में विलंब क्यों हुआ? इसके अतिरिक्त, जब 29 जून को तत्कालीन जिला शिक्षा अधीक्षक के स्थानांतरण की अधिसूचना जारी हो चुकी थी, तब 02 जुलाई को उनके नाम से आदेश जारी करने की आवश्यकता एवं वैधानिक औचित्य क्या था?
संघ का कहना है कि इन समस्त घटनाक्रमों से स्थानांतरण प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न उत्पन्न हो रहे हैं तथा पूरे मामले में अनियमितता की आशंका प्रतीत होती है। इसलिए इसकी स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाना आवश्यक है।
झारखंड प्रगतिशील शिक्षक संघ (JPSS) सह झारोटेफ माननीय मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, मुख्य सचिव, शिक्षा सचिव एवं निदेशक, प्राथमिक शिक्षा से मांग करता है कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जाए। साथ ही, जांच की निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से तत्कालीन जिला शिक्षा अधीक्षक सह वर्तमान जिला शिक्षा पदाधिकारी/क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक (DEO/RDDE), पलामू को जिले से बाहर स्थानांतरित करने पर भी सरकार विचार करे।
जारीकर्ता:
मनोज मेहता
जिला अध्यक्ष
झारखंड प्रगतिशील शिक्षक संघ (JPSS) सह JHAROTEF
पलामू जिला इकाई

