असम में कल्पना सोरेन का सवाल, झारखंड में सम्मान, यहां क्यों अपमान? महिलाओं के लिए ₹2500 की मांग

रांची (झारखंड)

झामुमो नेता कल्पना सोरेन ने असम दौरे के दौरान चाय बागानों में काम करने वाली महिलाओं से संवाद करते हुए उनके अधिकार और सम्मान का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। उन्होंने सवाल किया कि जब झारखंड में महिलाओं को हर महीने ₹2500 की सहायता दी जा रही है, तो असम में ऐसा क्यों नहीं हो सकता।

झारखंड मॉडल का हवाला
कल्पना सोरेन ने कहा कि झारखंड सरकार मानती है कि महिलाओं का सम्मान सिर्फ शब्दों से नहीं, बल्कि ठोस कदमों से होता है। उन्होंने झारखंड की योजनाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त किया जा रहा है।

असम सरकार पर सवाल
उन्होंने चाय बागानों में काम करने वाली महिलाओं की स्थिति पर चिंता जताते हुए पूछा कि क्या उनका श्रम और योगदान कम महत्वपूर्ण है। उन्होंने इसे सौतेला व्यवहार बताते हुए असम सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए।

नेतृत्व बदलने की अपील
कल्पना सोरेन ने लोगों से अपील की कि वे अपनी सोच और नेतृत्व में बदलाव लाएं, ताकि आने वाली पीढ़ियों को मजबूरी नहीं बल्कि सम्मानजनक जीवन मिल सके।

महिला सशक्तिकरण पर जोर
उन्होंने कहा कि महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत बनाना जरूरी है, तभी समाज और राज्य का समग्र विकास संभव है।

कुल मिलाकर, असम में कल्पना सोरेन का यह बयान चुनावी माहौल में महिला सशक्तिकरण के मुद्दे को केंद्र में लाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

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