विश्रामपुर (पलामू )
संत पॉल कॉन्वेंट स्कूल का वार्षिक परीक्षाफल एवं पुरस्कार वितरण समारोह शनिवार को भव्य और प्रेरणादायक माहौल में संपन्न हुआ। यह आयोजन केवल उपलब्धियों का उत्सव नहीं, बल्कि शिक्षा, अनुशासन और संस्कारों के प्रति विद्यालय की प्रतिबद्धता का जीवंत प्रदर्शन बन गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के पूजन एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद जैसे ही मेधावी छात्र छात्राओं को मंच पर सम्मानित किया गया, पूरा सभागार तालियों की गूंज से भर उठा।
मुख्य अतिथि पुलिस अंचल निरीक्षक रामाशीष पासवान ने अपने प्रभावशाली संबोधन में कहा, शिक्षा शेरनी का दूध है, जो इसे पीता है वही जीवन की हर चुनौती के सामने दहाड़ता है। उन्होंने विद्यार्थियों को लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर मेहनत करने की प्रेरणा दी। साथ ही पूर्व राष्ट्रपति A P J Abdul Kalam का उदाहरण देते हुए कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखना और उन्हें साकार करना ही सफलता का असली मार्ग है।
वहीं, रेहला थाना प्रभारी गुलशन बिरुवा ने कहा, मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता, यह वह पूंजी है जो कभी बेकार नहीं जाती। उन्होंने विद्यार्थियों को समय के सदुपयोग और निरंतर सीखने की आदत अपनाने की सलाह दी। साथ ही अभिभावकों को मोबाइल के दुरुपयोग से बच्चों को बचाने और सही मार्गदर्शन देने का आग्रह किया।
विद्यालय के निदेशक सायमन मैथ्यू एस्ले ने अपने संबोधन में कहा कि संस्थान का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर ध्यान केंद्रित करना है। उन्होंने बताया कि तकनीकी शिक्षा, शैक्षणिक भ्रमण और नैतिक मूल्यों के समन्वय से बच्चों को जीवनोपयोगी शिक्षा दी जा रही है, ताकि वे समाज के जिम्मेदार नागरिक बन सकें।
विद्यालय ने इस वर्ष 100% परीक्षा परिणाम हासिल किया, जिसमें कुल 947 छात्र छात्राएं शामिल हुए। जूनियर वर्ग में संतन कुमार और सीनियर वर्ग में अनिका कुमारी ने टॉपर बनकर विद्यालय का नाम रोशन किया।
विद्यालय प्रबंधन ने घोषणा की कि प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण सभी विद्यार्थियों की एक वर्ष की फीस माफ की जाएगी, जबकि टॉपर छात्रों को निःशुल्क पुस्तकें प्रदान की जाएंगी।
समारोह के अंत में अतिथियों को शॉल, बुके एवं मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया। यह आयोजन इस बात का प्रमाण बन गया कि जब शिक्षा में गुणवत्ता, अनुशासन और संस्कार का समावेश होता है, तो सफलता केवल परिणामों में नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण में भी झलकती है।

