मेदिनीनगर (पलामू)
डायन कुप्रथा समाज के लिए कलंक है ।इसे मिटाने के लिए लोगो को आगे आना होगा।जागरूकता से ही इसे मिटाया जा सकता हैं।उक्त बातें मध्यस्थ अधिवक्ता वीना मिश्रा ने कही। पलामू के प्रधान जिला व सत्र न्यायाधीश के निर्देश पर डालसा सचिव राकेश रजंन के मार्गदर्शन में बुधवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकार के तत्वाधान में पांकी प्रखंड के कुसडी गांव में आयोजित विधिक जागरूकता शिविर में बोल रही थी।उन्होंने कहा कि डायन बिसाही कोई चीज नही है ।यह अंधविश्वास हैं।इस मौके पर लीगल एड डिफेंस काउंसिल के असिस्टेंट उत्तम कुमार ने कहा कि डाउन बिसाही के मामले में पुरूष से ज्यादा महिलाएं शिकार होती हैं।उन्होंने कहा कि किसी महिला को डायन घोषित करने के पीछे अधिकांशतः मामले में साजिश होता हैं।पुराने रंजिश से झगड़ा के कारण उसके गांव या उसके जानने वाले ही डायन होने का अफवाह फैलाते है।उन्होंने कहा कि ऐसे लोगो को दंडित करने के लिए डायन प्रथा प्रतिषेध अधिनियम 2001 का प्रावधान किया गया है।इसके तहत कोई भी ब्यक्ति किसी की पहचान डायन के रुप मे करता है तो उसे तीन महीने की जेल सहित जुर्माना देना होगा।साथ ही डायन कहकर महिला को प्रताड़ित करता हैं तो छह माह तक जेल व जुर्माना देना पड़ेगा।उन्होंने कहा कि झाड़ फुक या टोटका से उपचार करने वाले ओझा या तांत्रिक भी कानूनी करवाई से नही बच सकते।उन्हें भी जेल की हवा खानी पड़ेगी।इस मौके पर पीएलवी चन्द्रेव प्रजापति ने कहा कि डालसा के माध्यम से गांव गांव में जन जागरूकता अभियान चलाकर लोगो को जागरूक किया जा रहा हैं।उन्होंने कहा कि डायन कुप्रथा के कारण गांव के गरीब लाचार व विधवा महिलाएं ज्यादा प्रभावित होती हैं।इस मौके पर आसेहार पंचायत के उपमुखिया अमित कुमार शर्मा, संतोष भुईया,शैलेंद्र पांडेय ने भी डालसा से प्रदत सुबिधा के बारे में जानकारी दिया।साथ ही पम्पलेट व हैंडबिल का भी ग्रामीणों के बीच बितरण किया गया।

