विश्रामपुर (पलामू)
विश्रामपुर नगर परिषद के वार्ड संख्या-1 स्थित करमही पहाड़ी इन दिनों खनन विवाद को लेकर चर्चा में है। यहां पत्थर माइंस के नाम पर लीज ली गई जमीन से आगे बढ़कर रैयत की अतिरिक्त भूमि पर कब्जा करने का गंभीर आरोप सामने आया है। पीड़ित रैयत अब प्रशासन के दरवाजे खटखटा रहा है, लेकिन कार्रवाई के इंतजार में उसकी उम्मीदें भी धीरे-धीरे थकती नजर आ रही हैं।
बताया जाता है कि पाटन थाना क्षेत्र के बयीदा गांव निवासी सतीश तिवारी ने वर्ष 2016 में करमही पहाड़ी स्थित लगभग 19 एकड़ जमीन मृत्युंजय पांडेय और उनके परिजनों से पत्थर माइंस के लिए लीज पर लिया था। समझौते के अनुसार खनन गतिविधि सिर्फ लीज वाली जमीन तक ही सीमित रहनी थी।
लेकिन आरोप है कि खनन का दायरा धीरे-धीरे लीज की सीमा लांघ गया और माइंस संचालक ने दो एकड़ अतिरिक्त जमीन पर भी कब्जा जमा लिया। यही नहीं, उस जमीन पर उत्खनन से निकले मेटल और छर्री का भंडारण भी कर दिया गया है।
रैयत मृत्युंजय पांडेय बताते हैं कि उनके परिवार के पास करमही पहाड़ी क्षेत्र में कुल 21 एकड़ जमीन है। इसमें से 19 एकड़ जमीन माइंस के लिए लीज पर दी गई थी, जबकि दो एकड़ सिंचित जमीन खेती के लिए बचाकर रखी गई थी, ताकि उसी से परिवार का गुजारा चल सके।
लेकिन उनका आरोप है कि माइंस संचालक ने उस दो एकड़ जमीन को भी नहीं छोड़ा। वहां जबरन कब्जा कर खनन सामग्री का ढेर लगा दिया गया। जब भी वे अपनी जमीन खाली कराने की बात कहते हैं, तो उन्हें डराया-धमकाया जाता है।
पीड़ित रैयत का कहना है कि इस अन्याय के खिलाफ उन्होंने कई बार बिश्रामपुर अंचल कार्यालय में आवेदन देकर गुहार लगाई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
अब मामला जिला प्रशासन तक ले जाने की तैयारी है। मृत्युंजय पांडेय ने कहा कि वे उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक और जिला खनन पदाधिकारी को आवेदन देकर अपनी जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराने की मांग करेंगे।
करमही पहाड़ी का यह विवाद अब सिर्फ एक जमीन का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा कर रहा है कि क्या लीज की आड़ में रैयतों की जमीन पर इस तरह कब्जा करना आसान हो गया है, या फिर प्रशासन इस पर सख्त कार्रवाई करेगा — इसका जवाब अब आने वाला समय ही देगा।

